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शुक्रवार, जनवरी 23, 2026
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पखांजूर: कचरे के ढेर में विस्फोट से झुलसीं दो महिला सफाईकर्मी; ईएसआई कार्ड के दावों की खुली पोल, सीएमओ को हटाने की मांग

कांकेर/पखांजूर (पब्लिक फोरम)। नगर पंचायत पखांजूर में मानवता और व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाने वाली दो महिला सफाई कर्मचारी- अनामिका मंडल और आलो पाल- एक भीषण हादसे का शिकार होकर अस्पताल में अपनी जिंदगी और हक की जंग लड़ रही हैं। कचरा सफाई के दौरान हुए एक रहस्यमयी विस्फोट ने न केवल इन महिलाओं को शारीरिक रूप से झुलसा दिया है, बल्कि विभाग की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की परतों को भी उधेड़ कर रख दिया है।

हादसे की भयावहता: झुलसा चेहरा और बिखरे सपने
घटना पखांजूर के नए बाजार इलाके की है, जहाँ नियमित सफाई के दौरान कचरे में छिपे किसी विस्फोटक पदार्थ के फटने से अफरा-तफरी मच गई। इस धमाके की चपेट में आईं आलो पाल का चेहरा और कान बुरी तरह झुलस गए हैं, यहाँ तक कि उनके सिर के बाल भी जल चुके हैं। वहीं दूसरी कर्मचारी अनामिका मंडल की स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है; उनके हाथ और चेहरा पूरी तरह जल चुके हैं। विडंबना यह है कि इस हादसे के कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो ठेका लेने वाली प्लेसमेंट एजेंसी ने और न ही नगर पंचायत प्रशासन ने उनका हाल जाना या इलाज की जिम्मेदारी उठाई।

ईएसआई कार्ड का ‘झूठ’ और कर्मचारियों का शोषण
इस प्रकरण ने नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें उन्होंने ईएसआई (ESI) कार्ड के संचालन में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से इनकार किया था।
छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष द्वारका कोसरिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “अगर इन कर्मचारियों के पास वैध ईएसआई कार्ड होते, तो आज उन्हें दर-दर भटकना नहीं पड़ता। उन्हें ईएसआई अस्पताल में मुफ्त इलाज मिलता और स्वस्थ होने तक सवैतनिक अवकाश की सुविधा भी मिलती। सीएमओ का पिछला बयान कि विभाग में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, पूरी तरह सफेद झूठ साबित हो रहा है।”

यूनियन की चेतावनी: बर्खास्त हों दोषी अधिकारी
कर्मचारी यूनियन ने इस मामले में सीधे तौर पर प्लेसमेंट एजेंसी ‘कलमी सर्विसेज’ और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत का आरोप लगाया है। यूनियन का कहना है कि सफाई कर्मचारियों को ‘गुलाम’ की तरह समझा जा रहा है, जहाँ उनसे काम तो लिया जाता है लेकिन संकट की घड़ी में उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
यूनियन की प्रमुख माँगें:
🔹घायल कर्मचारियों का पूरा इलाज ठेकेदार और प्रशासन अपने खर्च पर कराए।
🔹स्वस्थ होने तक की अवधि का पूरा वेतन और अवकाश प्रदान किया जाए।
🔹भ्रष्टाचार और लापरवाही के दोषी सीएमओ को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
🔹नियमों का उल्लंघन करने वाली ‘कलमी सर्विसेज’ का ठेका निरस्त किया जाए।
इस संबंध में जिलाधीश को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन ‘स्वच्छता दूतों’ को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा।

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