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गुरूवार, जनवरी 22, 2026
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बालको में सेवानिवृत्त कर्मियों के बकाया भुगतान और बलपूर्वक आवास खाली कराने पर श्रम आयुक्त रायपुर ने मांगी रिपोर्ट

रायपुर/कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के श्रम आयुक्त  कार्यालय रायपुर ने वेदांता समूह द्वारा संचालित भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको), कोरबा में सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़ी गंभीर शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए सहायक श्रम आयुक्त, कोरबा से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। मामला बकाया अंतिम भुगतान, चिकित्सा सुविधा से वंचित किए जाने और बिना उनके अंतिम भुगतान के बलपूर्वक आवास खाली कराने से जुड़ा है, जिसकी शिकायत बालको सेवानिवृत्ति कर्मचारी संगठन ने की थी।

श्रम आयुक्त कार्यालय, रायपुर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, बालको में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को: बकाया अंतिम भुगतान समय पर नहीं दिया गया, चिकित्सा सुविधाओं से वंचित किया गया तथा लंबे समय से आवंटित आवास खाली कराने का दबाव बनाया गया।

इन समस्याओं को लेकर बालको सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन, कोरबा ने 17 अक्टूबर 2025 को श्रम, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के मंत्री को लिखित शिकायत सौंपी थी। उसी शिकायत के आधार पर श्रम आयुक्त कार्यालय ने जिला स्तर पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

प्रशासनिक निर्देश: पत्र में सहायक श्रम आयुक्त, कोरबा को निर्देश दिया गया है कि वे – अब तक की गई कार्रवाई का विवरण, वर्तमान स्थिति की अद्यतन रिपोर्ट, तथा आवेदक संगठन सहित संबंधित पक्षों को दी गई राहत की जानकारी शीघ्रता से श्रम आयुक्त कार्यालय, रायपुर को उपलब्ध कराएं।

बालको में दशकों तक काम कर चुके कई सेवानिवृत्त कर्मचारी आज भी अपने बकाया भुगतान और इलाज की सुविधा के लिए वेदांता कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिन आवासों में उन्होंने नौकरी के वर्षों और जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया, उन्हें बिना उनके अंतिम भुगतान के, अचानक खाली करने का नोटिस उनके लिए मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की चिंता का कारण बना है। कई परिवारों के सामने वैकल्पिक आवास और इलाज की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन गई है।

श्रम आयुक्त कार्यालय रायपुर की यह पहल सेवानिवृत्त कर्मियों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें जिला प्रशासन कोरबा और श्रम विभाग की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि बालको-वेदांता प्रबंधन पर क्या ठोस कार्रवाई होती है और वर्षों सेवा देने वाले कर्मचारियों को कब तक वास्तविक राहत मिल पाती है।

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