रायपुर (पब्लिक फोरम)। हसदेव फर्जी ग्राम सभा मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने अनुसूचित जनजाति आयोग के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। “सरकार मुर्दाबाद” और “आयोग के सचिव एम के भुवाल मुर्दाबाद” के नारों से माहौल गरमा गया। मामला यह है कि फर्जी ग्राम सभा की जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए सर्व आदिवासी समाज और स्थानीय ग्रामीण आयोग के कार्यालय के बाहर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।
आदिवासी समाज का आरोप है कि आयोग के सचिव एम के भुवाल जानबूझकर रिपोर्ट देने में देरी कर रहे हैं। उनके हस्ताक्षर के बिना रिपोर्ट अधूरी है, और सचिव बिना किसी पूर्व सूचना के आज कार्यालय नहीं पहुंचे। उनकी अनुपस्थिति में आदिवासी समाज को रिपोर्ट नहीं मिल पाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और आयोग के बीच मिलीभगत है, जिसके चलते रिपोर्ट को रोका जा रहा है। उनका कहना है कि सचिव द्वारा जानबूझकर रिपोर्ट नहीं दी जा रही, जिससे आदिवासियों के अधिकारों पर कुठाराघात हो रहा है।
सर्व आदिवासी समाज ने आयोग के सचिव पर साजिश रचने का आरोप लगाते हुए तुरंत हटाने की मांग की है। प्रदर्शनकारी जल्द से जल्द फर्जी ग्राम सभा मामले की जांच रिपोर्ट जारी करने की मांग कर रहे हैं। आक्रोशित आदिवासियों ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव की चेतावनी भी दी है।
इस घटना से यह स्पष्ट है कि आदिवासी समाज का आक्रोश जायज है, क्योंकि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। फर्जी ग्राम सभा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर रिपोर्ट की देरी सरकारी और प्रशासनिक असफलता को दर्शाती है। यह एक गंभीर मामला है, क्योंकि आदिवासियों का यह आरोप कि रिपोर्ट को जानबूझकर रोका जा रहा है, उनकी आस्था और न्याय के प्रति विश्वास को चोट पहुंचाता है।
अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव का बिना सूचना दिए कार्यालय से अनुपस्थित रहना भी प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। यह घटना सिर्फ आदिवासी समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए चिंताजनक है। रिपोर्ट का समय पर न दिया जाना प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।
सरकार और आयोग को इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आदिवासी समाज का विश्वास कायम रहे और न्याय सुनिश्चित हो सके।





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