एलबी शिक्षकों ने सेवा सुरक्षा, पुरानी पेंशन और वेतन विसंगति दूर करने की मांग की
कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने मंगलवार, 25 अगस्त को एलबी संवर्ग के शिक्षकों की लंबित मांगों और सेवा संबंधी समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव तथा संबंधित अधिकारियों के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। मोर्चा ने सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता, पदोन्नति, पूर्व सेवा गणना, पुरानी पेंशन और वेतन विसंगतियों सहित कई मुद्दे उठाए।
ज्ञापन में मोर्चा ने सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता समाप्त कर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से रखी है। मोर्चा ने सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 की गई है।
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने TET की मूल अनिवार्यता को समाप्त नहीं किया है। अदालत ने समीक्षा याचिकाओं को खारिज करते हुए अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय दिया और राज्यों को TET परीक्षा नियमित रूप से, अधिमानतः वर्ष में दो बार आयोजित करने का सुझाव दिया है।
इसी संदर्भ में शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि छत्तीसगढ़ में कार्यरत एलबी संवर्ग के शिक्षकों की सेवा परिस्थितियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए शासन को सेवा सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

पहली नियुक्ति से सेवा गणना की मांग
मोर्चा ने एलबी संवर्ग के शिक्षकों की पूर्व सेवा को पंचायत संवर्ग में हुई प्रथम नियुक्ति तिथि से गणना करने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि सेवा अवधि का निर्धारण उनके वास्तविक कार्यकाल को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि वे वेतन, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सेवा लाभों से वंचित न हों।
इसके साथ ही मोर्चा ने पूर्ण पुरानी पेंशन सहित शिक्षा विभाग में लागू सभी सेवा लाभ एलबी संवर्ग के शिक्षकों को देने की मांग की है। यह मांग लंबे समय से चली आ रही सेवा-संबंधी मांगों से जुड़ी हुई है।
वेतन विसंगतियों के निराकरण की मांग
ज्ञापन में शिक्षकों की लंबित वेतन विसंगतियों को दूर करने का मुद्दा भी उठाया गया। मोर्चा ने केंद्रीय वेतनमान संरचना के आधार पर वेतन निर्धारण की मांग की है।
शिक्षकों के लिए वेतन केवल वर्तमान आय का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध उनके भविष्य के पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और पारिवारिक आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा है। इसलिए वेतन निर्धारण में विसंगति लंबे समय तक बनी रहने पर उसका प्रभाव सेवा अवधि के साथ-साथ सेवानिवृत्ति के बाद भी पड़ सकता है।
भर्ती-पदोन्नति नियमों में संशोधन की मांग
मोर्चा ने 13 फरवरी 2026 को जारी छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम में आवश्यक संशोधन करने की मांग भी की है।
मोर्चे के अनुसार, नियमों में ऐसा प्रावधान होना चाहिए जिससे एलबी संवर्ग के शिक्षकों के पूर्व सेवा अनुभव और वर्तमान सेवा स्थिति के हितों की पर्याप्त सुरक्षा हो सके। पदोन्नति से जुड़े प्रावधानों को लेकर शिक्षकों की चिंताओं को दूर करने के लिए शासन स्तर पर स्पष्टता जरूरी बताई गई है।
बीएड प्रशिक्षण के लिए ब्रिज कोर्स की मांग
ज्ञापन में उन शिक्षक संवर्गों के लिए भी विशेष व्यवस्था की मांग की गई है, जो बीएड प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर सके हैं। मोर्चा ने शिक्षा विभाग से योजना बनाकर ब्रिज कोर्स के माध्यम से ऐसे शिक्षकों को बीएड प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
मोर्चे का तर्क है कि प्रशिक्षण की आवश्यकता को पूरा करने के लिए शिक्षकों को व्यावहारिक और समयबद्ध अवसर मिलना चाहिए, ताकि आवश्यक शैक्षणिक योग्यता हासिल करने में उन्हें कठिनाई न हो।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें
– सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता समाप्त कर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
– पदोन्नति में TET की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग।
– पंचायत संवर्ग में प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्व सेवा की गणना करना।
– पूर्ण पुरानी पेंशन सहित शिक्षा विभाग के सभी सेवा लाभ देना।
– केंद्रीय वेतनमान संरचना के आधार पर वेतन निर्धारण कर वेतन विसंगतियां दूर करना।
– 13 फरवरी 2026 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शिक्षकों के हित में आवश्यक संशोधन करना।
– बीएड से वंचित शिक्षक संवर्ग के लिए ब्रिज कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने शासन से सभी मांगों और समस्याओं पर शीघ्र निर्णय लेकर आवश्यक आदेश जारी करने का आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान मोर्चा के कोरबा जिला संयोजक मनोज चौबे, वेदव्रत शर्मा और नित्यानंद यादव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
एलबी संवर्ग के शिक्षकों की मांगों का संबंध केवल सेवा नियमों से नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के वेतन, पदोन्नति, पेंशन और भविष्य की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है। अब इन मांगों पर शासन की ओर से होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। विशेष रूप से TET, सेवा गणना और भर्ती-पदोन्नति नियमों को लेकर स्पष्ट निर्णय शिक्षकों की आगे की स्थिति तय करेगा।





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