मंगलवार, जून 18, 2024
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पादरी की धारदार हथियार से बेरहमी से हत्या

प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन एलायंस छत्तीसगढ़ ने पादरियों की सुरक्षा एवं धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की

बीजापुर (पब्लिक फोरम)। 17 मार्च की शाम जब अंगमपल्ली गांव में होलिका दहन चल रहा था। चेहरे पर नकाब पहने 5-6 व्यक्तियों का एक अज्ञात गिरोह 55 वर्षीय पादरी यालम शंकर के घर आया और उन्हें बाहर लेकर आया और फिर धारदार हथियार से बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। यह घटना छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर जिले के मद्देड़ थाना के अंतर्गत अंगमपल्ली गांव की है।

पादरी यालम शंकर गांव और पंचायत के प्रमुख व्यक्ति थे। वे पूर्व सरपंच थे और उनकी बहू उनके कार्यकाल के बाद सरपंच के रूप में चुनी गई थी। वर्तमान में वे पादरी का काम करते थे और गांव तथा ईसाई समुदाय में ईसाइयों के बड़े हितैषी थे। उनकी हत्या से गांव और उसके आसपास में दहशत फैल गई है। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, बहू और पोता-पोती को छोड़ गए हैं। उनकी हत्या गांव और पूरे क्षेत्र के ईसाइ समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है।

अंगमपल्ली गांव कुछ महीनों से ईसाई विरोध का केंद्र बिंदु रहा है। कई महीनों से गांव में हिंदू कट्टरपंथियों और ईसाइयों के बीच उथल-पुथल चल रही है। कई बार हिंदू कट्टरपंथियों ने ईसाइयों को मारने और ईसाई धर्म का पालन करने वालों को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। कुछ महीनों पहले गांव में धर्म परिवर्तन की बात को लेकर हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा ईसाइयों से मारपीट की घटना सामने आई थी जिसकी शिकायत जिला मुख्यालय बीजापुर से 40 किलोमीटर दूर मद्देड़ थाने में भी की गई है।

विगत जनवरी माह में इस क्षेत्र में माओवादियों के नाम पर पर्चा फेंक कर धर्म परिवर्तन का विरोध किया गया था लेकिन निश्चित रूप से ये नहीं कहा जा सकता कि ये पर्चा किसने फेंका था?माओवादियों, हिंदू कट्टरपंथियों अथवा किसी और ने। पादरी यालम शंकर की हत्या के विषय में भी माओवादियों के नाम से इलाके में एक पर्चा फेंका गया है।

यालम शंकर की हत्या आम लोगों और ईसाइयों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फेंका हुआ पर्चा बताता है कि आलम शंकर माओवादियों और उनकी आंदोलनों का विरोधी थे। वह एक पुलिस मुखबिर थे जो माओवादियों की सभी गतिविधियों और इनपुट को स्थानीय और उच्च पुलिस अधिकारियों को सूचित करते थे। पुलिस अधिकारियों के द्वारा यालम शंकर की पुलिस मुखबिर होने का खंडन किया गया है।

पर्चा यह भी बताता है कि आलम शंकर माओवाद विरोधी और जनता विरोधी गतिविधियां कर रहे थे और उन्हें सुधार की चेतावनी दी गई थी क्योंकि उन्होंने खुद को सही नहीं किया इसलिए उन्हें पी.एल.जी.ए. (माओवादियों का एक विंग) के द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया।

लेकिन, एक बार फिर यह संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि क्या वास्तव में माओवादियों ने इस निर्मम हत्या को अंजाम दिया है? माओवादियों द्वारा तथाकथित पर्चा में पादरी यालम शंकर की हत्या की स्वीकारोक्ति को ईसाई विरोधी तत्वों द्वारा साजिश के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय पादरी और ईसाई विश्वासी इस बात पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं कि यह हत्या माओवादियों ने की है। पुलिस के द्वारा घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

प्रोग्रेसिव क्रिस्चियन अलायंस छत्तीसगढ़, शासन से ईसाईयों और विशेषकर उनके पादरियों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने, दोषियों पर कानून सम्मत कड़ी कार्यवाही करने तथा पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द व भावनाओं को बढ़ावा देने की मांग करता है।

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