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गुरूवार, मार्च 5, 2026
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जब रांची के मंच से गूँजा छत्तीसगढ़ – लघुकथा सम्राट बने जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी; राष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव में प्रथम स्थान

खरसिया (पब्लिक फोरम)। इज्जत नगर मेकॉन कॉलोनी, डोरंडा (रांची, झारखंड) में प्रातः 10:30 बजे से आयोजित भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सह साहित्य सम्मान सह विद्या वाचस्पति मानद सम्मान सह होली मिलन समारोह’ का सफल समापन अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ।

दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. कमल वर्मा (पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, संत जेवियर्स कॉलेज, रांची) की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों में प्रतिमा प्रसाद कुमकुम (जमशेदपुर), मनीषा सहाय (रांची) तथा अनिता रश्मि (रांची) ने मंच की शोभा बढ़ाई।

आयोजन की अध्यक्षता एवं संयोजन डॉ. सुबोध कुमार भारती (प्रधान संपादक एवं महासचिव) ने किया। मंच संचालन मधुमिता साहा ने प्रभावपूर्ण ढंग से किया तथा स्वागत भाषण भी उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया। काशी हिंदी विद्या पीठ के कुल सचिव इंद्रजीत तिवारी, पवन कुमार सिंह सहित अनेक साहित्यकारों की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय आयाम प्रदान किया।

देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों ने काव्य पाठ एवं विविध प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रमुख प्रतिभागियों में रेणुका झा, रिंकू वर्मा, मधुमिता साहा, शिखा गोस्वामी (मुंगेली, छत्तीसगढ़), रीमा कुमारी, ऋषि मिश्रा, पूजा उपाध्याय, अंजना सिन्हा, रेखा रमण, सीमा कुमार, बिंदु प्रसाद, रश्मि सिन्हा, मोनाशी प्रकाश, रिम्मी नाथ, संजय कुमार मिश्र, प्रफुल्लित प्रसाद, अर्चना रवि सहित अनेक रचनाकार शामिल रहे।

इसी आयोजन के अंतर्गत संपन्न लघुकथा लेखन प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के युवा साहित्यकार जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी ने अपनी सशक्त और संवेदनशील रचना से प्रथम स्थान अर्जित किया। उनकी लघुकथा में सामाजिक यथार्थ की सटीक अभिव्यक्ति, मानवीय मूल्यों की गहराई और जीवन के मार्मिक पक्ष का ऐसा समन्वय था जिसने निर्णायक मंडल को प्रभावित किया।

मंच से जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। यह क्षण केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना के राष्ट्रीय मंच पर स्वाभिमान के साथ स्थापित होने का प्रतीक था।

अपनी सफलता पर जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी ने विनम्र भाव से आदरणीया शिखा गोस्वामी, मुंगेली (छत्तीसगढ़) के मार्गदर्शन, विश्वास और सतत प्रेरणा के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया तथा इस उपलब्धि का श्रेय उन्हें समर्पित किया।

यह आयोजन साहित्य, सम्मान और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।

“शब्दों से रचा इतिहास, कलम ने किया कमाल,
रांची के मंच से गूँजा छत्तीसगढ़ का लाल।
सृजन की ज्योति जली, बढ़ा प्रदेश का मान,
जीतेन्द्र की लेखनी बने यश का अभियान।”


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