कोरबा/बालको नगर (पब्लिक फोरम)। बालको में एक बार फिर वेदांता प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश की लहर उठी है। बालको के स्थापना दिवस (27 नवंबर) से पहले ही वेदांता पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। बुधवार, 12 नवंबर से शुरू हुई इस कार्रवाई ने पूरे नगर में तनाव का माहौल बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार, वेदांता-बालको के प्रशासन प्रमुख एवं कॉरपोरेट अफेयर्स अधिकारी कैप्टन धनंजय मिश्रा और नगर प्रशासन प्रमुख सुमंत सिंह के नेतृत्व में वेदांता की टीम ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आवासों की बिजली, पानी और शौचालय की आपूर्ति बंद कर दी। यह कदम कथित तौर पर कर्मचारियों को मकान खाली करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से उठाया गया।
त्रिपक्षीय बैठक के बाद भी जारी है मनमानी
हाल ही में एसडीएम कार्यालय कोरबा में श्रमिक संगठन अल्युमिनियम कामगार संघ (ऐक्टू), बालको सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन, आदिनिवासी गण परिषद, मूल निवासी मुक्ति मोर्चा, हम होंगे कामयाब शक्ति केंद्र और अन्य सामाजिक संगठनों से समर्थन प्राप्त “बालको बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति” की मौजूदगी में जिला प्रशासन ने वेदांता प्रबंधन से त्रिपक्षीय बैठक की थी।
बैठक में यह सहमति बनी थी कि बालको में किसी भी कर्मचारी या छोटे व्यापारियों के साथ जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। वेदांता प्रबंधन सेवानिवृत कर्मचारियों के बकाया राशि की भुगतान की कार्रवाई शुरू करेगा। लेकिन, वेदांता का इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल करना तो दूर, उल्टा प्रबंधन ने 12 नवंबर से कर्मचारियों का बिजली पानी एवं शौचालय सिस्टम काटकर, पुनः दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।
बालको बचाओ समिति का कड़ा विरोध
बालको बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति ने वेदांता प्रबंधन के इस रवैये की तीखी निंदा की है। समिति ने कहा कि बिना अंतिम भुगतान किए किसी भी कर्मचारी को आवास खाली करने के लिए बाध्य करना कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
संयोजक बी.एल. नेताम ने स्पष्ट कहा – “कर्मचारी किसी भी परिस्थिति में डरें नहीं। बिना अपना अंतिम भुगतान पाए, कोई भी कर्मचारी आवास खाली न करे। यह वेदांता की शोषणकारी नीति का हिस्सा है, जिसका हम एकजुट होकर विरोध करेंगे।”
समिति ने सभी प्रभावित कर्मचारियों से अपील की है कि वे पुलिस को तुरंत सूचना दें और संघर्ष समिति के संयोजक मंडल को भी लिखित रूप में शिकायत भेजें।
बढ़ता असंतोष और प्रशासन से शिकायत
जानकारी के अनुसार, जिन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के क्वार्टर की बिजली-पानी और शौचालय व्यवस्था काटी गई है, उन्होंने बालको थाना में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही समिति ने जिला प्रशासन से मिलकर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देने और हस्तक्षेप की मांग करने का निर्णय लिया है।
संघर्ष समिति ने यह भी घोषणा की है कि वेदांता प्रबंधन के कर्मचारी-विरोधी और शोषणकारी रवैये के खिलाफ चल रहा धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक एक सम्मानजनक समाधान नहीं निकलता।
संघर्ष समिति का आह्वान
संयोजक बी.एल. नेताम ने कहा कि जिन कर्मचारियों के मकानों की सुविधाएँ काट दी गई हैं या जिन पर दबाव बनाया जा रहा है, वे 14 नवंबर को सुबह 11 बजे समिति से संपर्क करें, ताकि उनके पक्ष में सामूहिक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने दोहराया— “यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की लड़ाई है। कोई भी डर या दबाव इस एकता को तोड़ नहीं सकता।”
बालको में यह विवाद केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि कर्मचारी अधिकारों और कॉर्पोरेट जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है। बालको के स्थापना दिवस से पहले वेदांता प्रबंधन की यह सख्त नीति न केवल कर्मचारियों में असंतोष फैला रही है, बल्कि स्थानीय संगठनों और स्थानीय नागरिकों को भी चिंतित कर रही है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और वेदांता प्रबंधन पर हैं— क्या वे इस संघर्ष को संवेदनशीलता और न्याय के साथ सुलझा पाएंगे?





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