कोरबा (पब्लिक फोरम)। ऊर्जाधानी के नाम से मशहूर कोरबा जिले का बालको शांतिनगर इलाका आज विकास के नाम पर विनाश का दंश झेलने को मजबूर है। वेदांता बालको द्वारा स्थापित कूलिंग टावर परियोजना, जो कभी प्रगति का प्रतीक मानी जा रही थी, आज सैकड़ों परिवारों के लिए गले की फांस बन गई है। वर्षों से प्रदूषण, बीमारियों और आजीविका के संकट से जूझ रहे प्रभावितों ने अब शासन-प्रशासन की चुप्पी से तंग आकर CBI जांच की मांग की है।
सांसों पर संकट और फाइलों में हेराफेरी
शांतिनगर के रहवासियों का आरोप है कि कूलिंग टावर के निर्माण और संचालन ने न केवल उनका पर्यावरण दूषित किया है, बल्कि उनके घरों में दरारें और स्वास्थ्य में गिरावट भी ला दी है। कायदे से प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास और पुनर्स्थापन (R&R) का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि कंपनी प्रबंधन और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत ने हकीकत को फाइलों में दफन कर दिया। प्रभावितों का कहना है कि रिकॉर्ड में अनियमितताएं बरती गईं और तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया, ताकि मुआवज़े की राशि और पुनर्वास की जिम्मेदारी से बचा जा सके।

राज्यपाल से न्याय की गुहार
इस गंभीर मानवीय मुद्दे को लेकर अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। समाजसेवी सौरभ अग्रवाल ने प्रभावित नागरिकों की आवाज़ बनते हुए महामहिम राज्यपाल को एक विस्तृत पत्र (दिनांक 14/01/2026) सौंपा है। पत्र में स्पष्ट मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष CBI जांच कराई जाए।
श्री अग्रवाल का कहना है, “जब सिस्टम बहरा हो जाए, तो न्याय के सबसे बड़े दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं। यह सिर्फ मुआवज़े की लड़ाई नहीं है, यह हजारों लोगों के मानवाधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई है।”
कलेक्टर जनदर्शन में भी नहीं हुई सुनवाई
प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि राज्यपाल को पत्र लिखने के बाद, स्थानीय स्तर पर जिला कलेक्टर को भी जनदर्शन कार्यक्रम के तहत आवेदन (टोकन क्रमांक: 2050126000335, दिनांक 02/02/2026) दिया गया। विडंबना यह है कि आवेदन देने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई भी ठोस या प्रभावी कार्रवाई धरातल पर नहीं दिखाई दी है।
प्रभावितों की प्रमुख मांगें:-
🔸CBI जांच: पूरे प्रोजेक्ट और पुनर्वास प्रक्रिया में हुई धांधली की केंद्रीय एजेंसी से जांच।
🔸सम्पूर्ण पुनर्वास: कानून के मुताबिक सभी प्रभावितों को R&R (पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन) का पूरा लाभ।
🔸मुआवज़ा और सुरक्षा: स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ पर्यावरणीय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
अब आगे क्या?
शांतिनगर के निवासी अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि महामहिम राज्यपाल और जिला प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप कर इस अन्यायपूर्ण स्थिति का समाधान नहीं किया, तो उनका आक्रोश और उग्र रूप ले सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन की नींद टूटती है, या शांतिनगर का यह दर्द यूं ही धुएं में उड़ता रहेगा।





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