सक्ती (पब्लिक फोरम)। शासकीय क्रांति कुमार भारतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सक्ती में उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार जनजाति गौरव दिवस पर एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी नायकों के ऐतिहासिक योगदान, उनकी सांस्कृतिक विरासत तथा जल–जंगल–जमीन की रक्षा हेतु उनके संघर्ष को स्मरण करना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्या सिदार (प्रदेश मंत्री एवं जिला पंचायत सदस्य—सभापति) उपस्थित रहीं। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में बीरेंद्र लकड़ा (अपर कलेक्टर, सक्ती) तथा विशिष्ट अतिथि चेतन साहू (अध्यक्ष, जनभागीदारी समिति) शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. शकुंतला राज एवं प्रो. ललित कुमार सिंह द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ बिरसा मुंडा और मां सरस्वती के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात प्राचार्य डॉ. डी. पी. पाटले ने मुख्य अतिथि विद्या सिदार का पुष्पगुच्छ और बैच लगाकर स्वागत किया। अति विशिष्ट अतिथि बीरेंद्र लकड़ा का स्वागत डॉ. शकुंतला राज ने तथा चेतन साहू का स्वागत प्रो. सोमेश कुमार घिटोड़े (जिला संगठक, एनएसएस) ने किया। कार्यक्रम से जुड़े अन्य सम्मानित शिक्षकों और अतिथियों का भी औपचारिक स्वागत किया गया।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. यज्ञ राठिया ने किया। उन्होंने जनजाति गौरव दिवस के इतिहास और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी आदिवासी महानायकों को नमन किया। छात्रा पायल सिदार ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि प्रिया मैत्री ने प्रभावशाली भाषण से सभी का ध्यान आकर्षित किया।

छात्र-छात्राओं द्वारा समूह नृत्य, एकल नृत्य, भाषण और जनजातीय नायकों पर आधारित अभिनय प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने बिरसा मुंडा सहित अन्य जनजातीय नायकों के संघर्ष और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर कार्यक्रम में उत्साह भर दिया।

अपर कलेक्टर बीरेंद्र लकड़ा ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और जल–जंगल–जमीन के संरक्षण के संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए संघर्षरत रहा है और यही प्रेरणा पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण सीख है।
मुख्य अतिथि विद्या सिदार ने आदिवासी जननायकों के अमर योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व आदिवासी संस्कृति की विशिष्टता को मान्यता दे रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय देश के नेतृत्व को जाता है।

विशिष्ट अतिथि चेतन साहू ने भी जनजाति गौरव दिवस की शुभकामनाएं देते हुए महानायकों को नमन किया।
एनएसएस जिला संगठक प्रो. सोमेश कुमार घिटोड़े ने बिरसा मुंडा के जीवन और उनके असाधारण योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें “धरती आबा” के रूप में याद किया।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. डी.पी. पाटले ने जनजातीय महानायकों को मानव समाज के उत्थान का मार्गदर्शक बताते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। सभी अतिथियों का औपचारिक आभार डॉ. शकुंतला राज ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में संस्था के सभी संकाय सदस्य, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।






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