पुलिस-प्रशासन की कड़ी चौकसी, शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लागू
घायल हुए 11 लोग, वाहनों में लगाई आग
नागपुर (पब्लिक फोरम)। महाराष्ट्र के नागपुर शहर में सोमवार शाम एक साधारण विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक दंगों में बदल गया। औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अफवाहों के चलते भड़क उठा, जिससे पत्थरबाजी, आगजनी और हिंसा का दौर शुरू हो गया।
शहर के महाल इलाके में दो समुदायों के बीच झड़पें इतनी भयानक हो गईं कि पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस हिंसा में कम से कम 11 लोग घायल हुए, जिनमें कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। शहर के कई वाहन आग की लपटों में घिर गए और एक जेसीबी मशीन भी जला दी गई।
विवाद की जड़: कौन सी अफवाह बनी आग में घी?
हिंसा की शुरुआत तब हुई जब सोमवार को विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महाल गांधी गेट परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने औरंगजेब का पुतला जलाया। उनकी मांग थी कि खुल्दाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) में स्थित औरंगजेब की कब्र को हटाया जाए, क्योंकि उनके अनुसार वह एक “अत्याचारी शासक” था।
इस प्रदर्शन के बाद शाम करीब 7 बजे शिवाजी चौक के पास दो समूहों के बीच नारेबाजी शुरू हुई। इसी बीच, एक अफवाह फैली कि प्रदर्शन के दौरान कलमा लिखा कपड़ा और एक पवित्र पुस्तक जला दी गई है। यह अफवाह फैलते ही हालात बिगड़ गए और चिटनिस पार्क से भालदारपुरा इलाके तक हिंसा फैल गई।
“हमें अचानक छतों से पत्थरबाजी का सामना करना पड़ा। हम हैरान थे कि इतने बड़े-बड़े पत्थर कहां से आए,” एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई: 10 थाना क्षेत्रों में लगा कर्फ्यू
नागपुर पुलिस आयुक्त डॉ. रविंदर कुमार सिंगल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शहर के 10 थाना क्षेत्रों – कोतवाली, गणेशपेठ, लकड़गंज, पचपावली, शांतिनगर, सक्करदरा, नंदनवन, इमामवाड़ा, यशोधरा नगर और कपिल नगर में कर्फ्यू लगा दिया है। अगले आदेश तक यह कर्फ्यू जारी रहेगा।
“हमने लगभग 50 लोगों को हिरासत में लिया है और हिंसा के पीछे की साजिश की जांच कर रहे हैं,” नागपुर के ज्वाइंट कमिश्नर निसार तंबोली ने बताया।
संवेदनशील इलाकों में राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF), दंगा नियंत्रण पुलिस और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की तैनाती की गई है।
नेताओं की प्रतिक्रिया: “शांति बनाए रखें”
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “नागपुर शांति और सद्भाव के लिए जाना जाता है। मैं नागरिकों से अपील करता हूं कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन का सहयोग करें।”
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी औरंगजेब का महिमामंडन करने वालों को “देशद्रोही” करार देते हुए कड़ी निंदा की।
राजनीतिक रंग: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा विधायक प्रवीण दटके ने दावा किया कि हिंसा में “बाहरी लोग” शामिल थे और यह एक सुनियोजित साजिश थी। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे भाजपा की “विभाजनकारी नीति” का हिस्सा बताया।
VHP के महाराष्ट्र-गोवा क्षेत्र के प्रमुख गोविंद शेंडे का बयान, “हमने बाबरी ढांचे को गिराने की कसम खाई थी, वो पूरी की। अब औरंगजेब की कब्र हटाने की शपथ ली है और इसे भी पूरा करेंगे,” विवाद को और हवा दे सकता है।
समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने औरंगजेब की तारीफ की थी, ने भी इस मुद्दे को गरमाया। आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र से निलंबित कर दिया गया है।
क्या अब भी खतरे में है शांति?
आज सुबह 6:30 बजे तक, नागपुर में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव अब भी बरकरार है। खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र की सुरक्षा के लिए पहले से ही CRPF और पुलिस तैनात है, लेकिन नागपुर की घटना ने इसे राज्यव्यापी मुद्दा बना दिया है।
स्थानीय निवासी मनोज वर्मा कहते हैं, “हम दशकों से यहां शांति से रह रहे हैं। ऐसी हिंसा हमारे शहर की छवि को नुकसान पहुंचाती है। हमें एक-दूसरे के साथ सद्भाव से रहना चाहिए।”
प्रशासन ने कड़े कदम उठाने की बात कही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अफवाहों पर अंकुश लगाने और दोनों समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि शांति बहाल की जा सके।
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