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गुरूवार, जनवरी 22, 2026
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कोरबा में वकीलों की वेशभूषा पर सख्ती: फर्जी पहचान और दलाली रोकने के लिए अधिवक्ता संघ का कड़ा आदेश

कोरबा (पब्लिक फोरम)। जिला अधिवक्ता संघ, कोरबा ने वकीलों की वेशभूषा की नकल कर खुद को अधिवक्ता बताने और न्यायालय परिसर में भ्रम की स्थिति पैदा करने की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। 7 जनवरी 2026 को जारी “अति आवश्यक सूचना” में संघ ने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण के अधिवक्ता जैसी वेशभूषा पहनकर न्यायालय परिसर में प्रवेश और न्यायिक कार्यवाही में भाग लेना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह निर्णय 29 दिसंबर 2025 को हुई संघ की कार्यकारिणी बैठक के बाद लिया गया।

क्या है मामला और क्यों लिया गया निर्णय
संघ के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे मामलों की शिकायतें बढ़ी हैं, जहां कुछ लोग – लॉ ग्रेजुएट, लॉ स्टूडेंट या मुंशी – काला कोट पहनकर स्वयं को अधिवक्ता बताने लगे। इससे न केवल वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायालय की चिंता बढ़ी, बल्कि आम लोगों में भी भ्रम की स्थिति बनी। इसी को देखते हुए संघ ने नियमों को कड़ाई से लागू करने का फैसला किया।

मुख्य निर्देश और प्रतिबंध
संघ के आदेश में निम्नलिखित बातें स्पष्ट की गई हैं:-
🔹केवल पंजीकृत अधिवक्ता ही अधिवक्ता जैसी वेशभूषा (सफेद शर्ट, काली पैंट, काला कोट) पहनकर अधिवक्ता भवन तथा सिविल/राजस्व न्यायालय परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।
🔹बिना पंजीकरण अधिवक्ता वेशभूषा पहनना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
🔹लॉ ग्रेजुएट/लॉ स्टूडेंट/मुंशी को मान्यता प्राप्त मुंशी का बैज और दृश्यमान परिचय पत्र अनिवार्य रूप से पहनना होगा।
🔹न्यायालयीन कार्यवाही में अनधिकृत भागीदारी पूरी तरह निषिद्ध रहेगी।

नियम तोड़ने पर कार्रवाई
संघ ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उसे शह देने वाले अधिवक्ता के विरुद्ध भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य भ्रम की स्थिति रोकना, विधि व्यवसाय के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना और दलाली जैसी गतिविधियों को समाप्त करना है।

आम लोगों पर प्रभाव
इस आदेश से न्यायालय आने वाले आम नागरिकों को सही मार्गदर्शन मिलेगा। फर्जी पहचान के कारण जो लोग गलत सलाह या ठगी का शिकार होते थे, उन पर रोक लगेगी। इससे न्यायालय की गरिमा बनी रहेगी और वादकारियों का भरोसा मजबूत होगा।
संघ ने सभी अधिवक्ताओं और संबंधित व्यक्तियों से आदेश का सख्ती से पालन करने की अपील की है। आने वाले दिनों में निगरानी और जांच बढ़ाई जा सकती है, ताकि नियमों का उल्लंघन न हो और न्याय प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

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