रायपुर (पब्लिक फोरम)। जन संस्कृति मंच (जसम) की रायपुर इकाई द्वारा 23 जनवरी 2026 को आयोजित ‘सृजन संवाद-3’ समकालीन साहित्य, वैचारिक विमर्श और सांस्कृतिक प्रतिरोध का सशक्त मंच बनेगा। सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में शाम चार बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में देश के चर्चित लेखक, कवि, आलोचक और संस्कृतिकर्मी एकत्र होंगे। कार्यक्रम का केंद्र प्रतिवाद की रचनाएँ होंगी—जिनका पाठ, संवाद और विचार-विनिमय समकालीन समय के प्रश्नों से सीधे जुड़ता है।
इस वैचारिक-सांस्कृतिक संगोष्ठी में देश के ख्यात कथाकार मनोज रुपड़ा के साथ हरिओम राजोरिया (अशोकनगर), बसंत त्रिपाठी (इलाहाबाद), विनोद वर्मा (रायपुर), सुदीप ठाकुर (रायपुर), लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता (इलाहाबाद) और समीर दीवान (रायपुर) अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। केवल पाठ तक सीमित न रहते हुए, ये रचनाकार श्रोताओं और दर्शकों से सीधे संवाद भी करेंगे—जहां साहित्य की सामाजिक भूमिका, वैचारिक प्रतिबद्धता और प्रतिरोध की भाषा पर गंभीर चर्चा होगी।
कार्यक्रम में जनवादी सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति जनगीतों के माध्यम से होगी। वर्षा बोपचे, सुनीता शुक्ला और सीमा राजोरिया की प्रस्तुतियाँ सांस्कृतिक प्रतिरोध को स्वर और संवेदना देंगी। आयोजन का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी करेंगे, जबकि आभार प्रदर्शन रूपेंद्र तिवारी द्वारा किया जाएगा।
जन संस्कृति मंच का यह आयोजन उन प्रगतिशील और जनवादी मूल्यों की पुष्टि है, जिनके अनुसार विचारधारा अभी जीवित है—और इतिहास को न तो मिटाया जा सकता है, न ही उसे मौन कराया जा सकता है। मंच का स्पष्ट आह्वान है कि वे सभी लेखक, पत्रकार, कवि, कलाकार और संस्कृतिकर्मी, जो सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक चेतना और वैचारिक ईमानदारी में विश्वास रखते हैं, इस संवाद में सक्रिय भागीदारी करें। यह आयोजन साहित्य को महज़ सौंदर्यशास्त्र नहीं, बल्कि सामाजिक हस्तक्षेप के औज़ार के रूप में देखने का आग्रह करता है।
मीडिया के उन साथियों के लिए, जो अपने प्रिय लेखकों से संवाद या साक्षात्कार करना चाहते हैं, संपर्क विवरण उपलब्ध कराया गया है। रायपुर जसम के सचिव इंद्र कुमार राठौर से मोबाइल 90986 49505 तथा कोषाध्यक्ष डॉ. संजू पूनम से मोबाइल 97541 33546 पर संपर्क किया जा सकता है।
‘सृजन संवाद-3’ समकालीन हिंदी साहित्य में प्रतिरोध, प्रतिबद्धता और संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होने जा रहा है – जहां शब्द सत्ता से प्रश्न करेंगे और संवेदना समाज से जुड़ेगी।





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