बिलासपुर/कोरबा (पब्लिक फोरम)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के निदेशक मंडल ने गेवरा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट से प्रभावित नरईबोध गांव के विस्थापितों के हित में एक दूरगामी और मानवीय निर्णय लिया है। बोर्ड ने कुसमुंडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जरहाजेल गांव की 74.71 एकड़ (30 हेक्टेयर) भूमि को पुनर्वास और पुनर्वस्थापन (R&R) स्थल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है।
यह कदम न केवल गेवरा परियोजना के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि विस्थापित परिवारों को एक सुरक्षित और स्थायी ठिकाना भी प्रदान करेगा।
आर्थिक लाभ से ऊपर ‘सामाजिक सरोकार’
SECL प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यद्यपि जरहाजेल की भूमि कोयला युक्त है, लेकिन ‘सीएमपीडीआईएल’ (CMPDIL) की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार यहाँ केवल भूमिगत खनन ही संभव है। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में, यहां कोयला उत्पादन की लागत (2309 – 2936 रुपए प्रति टन) इसकी अधिसूचित कीमत (1600 रुपए प्रति टन) से काफी अधिक है। ऐसे में कंपनी ने इस भूमि का व्यावसायिक दोहन करने के बजाय इसे सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए उपयोग करना अधिक श्रेयस्कर समझा।

भविष्य की सुरक्षा: तकनीक का अभेद्य कवच
पुनर्वास स्थल पर ‘भूमि धंसने’ (Subsidence) जैसी आशंकाओं को जड़ से समाप्त करने के लिए SECL ने अत्याधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों की रूपरेखा तैयार की है:-
🔹सैंड स्टोइंग और पेस्ट फिल: भूमि की आंतरिक स्थिरता बनाए रखने के लिए रिक्त स्थानों को रेत और विशेष मिश्रण (Paste Fill) से भरा जाएगा।
🔹मजबूत अवसंरचना: सुरक्षा के दृष्टिकोण से यहाँ ड्रेनेज सिस्टम और रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा, ताकि मिट्टी के कटाव या अस्थिरता की कोई गुंजाइश न रहे।
🔹विशेषज्ञ निगरानी: क्षेत्र सुरक्षा अधिकारी द्वारा डंप का गहन निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें भूमि को पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित पाया गया है।
प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच विश्वास का सेतु
प्रबंधन ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी। आधुनिक सुरक्षा मानकों के कार्यान्वयन के बाद ग्रामीणों को भविष्य में पुन: विस्थापन का दंश नहीं झेलना पड़ेगा। स्थानीय पार्षद और नरईबोध के निवासियों ने भी SECL के इस पारदर्शी और सुरक्षित पुनर्वास प्रस्ताव पर अपनी सहमति और अटूट विश्वास जताया है।
SECL का यह निर्णय औद्योगिक विकास और सामाजिक न्याय के बीच एक बेहतरीन संतुलन का उदाहरण है। जहाँ एक ओर देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए गेवरा परियोजना का विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर विस्थापितों को आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा के वादे के साथ एक नया जीवन मिलेगा।





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