कांकेर (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय कर्मचारी यूनियन द्वारा छह सूत्रीय मांगों को लेकर 5 जनवरी से अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा का असर सामने आया है। पिछले दस वर्षों में पहली बार कर्मचारियों को माह की 2 तारीख को वेतन का भुगतान किया गया। इसे यूनियन ने कर्मचारियों की एकता और संगठित संघर्ष की आंशिक जीत बताया है।
यूनियन के कांकेर इकाई अध्यक्ष राकेश बिछिया और महासचिव दिलीप साहू ने जारी प्रेस बयान में कहा कि यह कदम लंबे समय से चली आ रही अनियमित वेतन-भुगतान व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि समय पर वेतन भुगतान हुआ है, लेकिन पांच प्रमुख मांगें अब भी लंबित हैं।
नेताओं ने बताया कि बीते एक दशक में वेतन का भुगतान कभी भी निश्चित समय पर नहीं किया गया। आमतौर पर कर्मचारियों को माह की 20 या 25 तारीख को वेतन मिलता रहा। इस संबंध में कई बार सीएमओ को लिखित ज्ञापन और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। आंदोलन की घोषणा के बाद ही प्रशासन ने समय पर भुगतान सुनिश्चित किया।
यूनियन के अनुसार, बोनस भुगतान, ईएसआई कार्ड की त्रुटियों का सुधार, और वेतन पर्ची का नियमित वितरण जैसे मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं। नेताओं ने उम्मीद जताई कि इन मांगों पर भी शीघ्र सकारात्मक निर्णय होगा, क्योंकि ये सभी श्रम कानूनों के दायरे में आते हैं।
इधर, 5 जनवरी से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन आंदोलन की रणनीति और रूपरेखा तय करने के लिए यूनियन की कोर ग्रुप बैठक आयोजित की जाएगी। यूनियन ने संकेत दिया है कि लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।





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