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गुरूवार, जनवरी 22, 2026
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बालको नगर में नववर्ष उत्सव और ‘संविधान शौर्य दिवस’ का आयोजन: सामाजिक न्याय के लिए बलिदान देने वाले वीरों को किया गया नमन

कोरबा (पब्लिक फोरम)। बालको नगर में 1 जनवरी 2026 को नववर्ष उत्सव और भारत के संविधान के शौर्य को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सिद्धार्थ लोक कल्याण समिति और मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन मूलनिवासी कार्यालय प्रांगण में हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नववर्ष का स्वागत करने के साथ-साथ भारत में जातीय पूंजीवाद, लिंगभेद, सांप्रदायिकता और छुआछूत जैसी अमानवीय व्यवस्थाओं के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर योद्धाओं और महापुरुषों की पावन स्मृति को नमन करना था।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन के छोटे भाई, लोकप्रिय पार्षद और समाजसेवी नरेंद्र देवांगन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिद्धार्थ लोक कल्याण समिति एवं मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष गोपाल ऋषिकर भारती ने की।

कार्यक्रम में बालको के पार्षद सत्येंद्र दुबे, जमनीपाली के पार्षद एवं जिला खनिज न्यास सलाहकार समिति के सदस्य मुकुंद सिंह कंवर, कोहड़िया क्षेत्र के संयोजक पुरानचंद पटेल विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन सुनील सुना ने किया, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी एस.सी. ढोके और सह-आयोजक के.एस. मडामें ने निभाई। इसके अलावा केंद्रीय प्रतिनिधि निरंजन प्रधान, जिला संयोजक एम-3 क्रांति कुमार साव सहित मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी और समाजसेवी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि नरेंद्र देवांगन ने सभी नागरिकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि समाज की असली सेवा बुजुर्गों, जरूरतमंदों और कमजोर वर्गों के साथ खड़े होने में है। इसी भाव के साथ उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कंबल वितरण कर नववर्ष की शुरुआत की। उनके इस कदम ने उपस्थित लोगों के बीच मानवीय संवेदना और आपसी सहयोग का संदेश दिया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। मंच से संविधान के मूल्यों- समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे- पर विस्तार से चर्चा की गई और यह संदेश दिया गया कि सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना अतीत में था।

कार्यक्रम का समापन एक भावुक वातावरण में हुआ, जहां लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे संविधान की भावना को अपने दैनिक जीवन में उतारेंगे और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सम्मान पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। यह आयोजन न केवल नववर्ष का उत्सव था, बल्कि सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की एक सार्थक पहल भी साबित हुआ।

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