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ऐक्टू की राष्ट्रीय बैठक: श्रम कोड निरस्तीकरण और निजीकरण विरोध पर विशेष चर्चा

पटना (पब्लिक फोरम)। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की दो दिवसीय बैठक 17 जून 2024 को पटना के दारोगा राय पथ स्थित ऐक्टू राज्य कार्यालय में आरंभ हुई। यह बैठक 18 जून तक चलेगी, जिसमें विभिन्न राज्यों और सेक्टरों से 50 प्रमुख मजदूर नेता भाग ले रहे हैं।

बैठक की अध्यक्षता ऐक्टू के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. शंकर, महासचिव राजीव डिमरी, एमएलसी और ऐक्टू राष्ट्रीय सचिव एवं स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव शशि यादव, ऐक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं रसोइया संघ महासचिव सरोज चौबे, तथा ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव एवं बिहार राज्य महासचिव आर.एन. ठाकुर की पांच सदस्यीय टीम कर रही है।

2024 चुनाव का संदेश: मोदी सरकार की नीतियों का खारिज होना

ऐक्टू ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि 2024 के चुनावों में जनता ने मोदी सरकार की कारपोरेटपरस्त, साम्प्रदायिक, विभाजनकारी और तानाशाही नीतियों को खारिज कर दिया है। जनता ने मजदूर और मेहनतकश गरीब जनता के बुनियादी सवालों को इस चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना दिया। ऐक्टू इन मुद्दों को मुखर आवाज देने और व्यापक अभियान चलाने पर विचार कर रहा है।

मजदूरों के हित में ऐक्टू की मांगें

बैठक में निम्नलिखित प्रमुख मांगों पर विशेष चर्चा हो रही है:-

1. चार श्रम कोड निरस्त करना: मजदूरों के अधिकारों को छीनने वाले इन कोड्स को रद्द करने की मांग।
2. निजीकरण पर रोक: बैंक, कोयला, रक्षा उत्पाद, खदानों समेत देश के सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण को रोकने की मांग।
3. अग्निवीर और ठेकाकरण पर रोक: अस्थायी नौकरियों और ठेके पर काम करने की प्रवृत्ति को रोकना।
4. न्यूनतम मजदूरी: सभी कामगारों को मासिक 26,000 रुपये की न्यूनतम मजदूरी देने की मांग।
5. स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मी का दर्जा: स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग।
6. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन: निर्माण सहित असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों को मासिक 9,000 रुपये पेंशन देने की मांग।
7. पुरानी पेंशन स्कीम लागू करना: ओल्ड पेंशन स्कीम को पुनः लागू करने की मांग।

बैठक में नेताओं का संबोधन

बैठक को विभिन्न राज्यों से आए नेताओं ने संबोधित किया, जिनमें ओडिशा से महेन्द्र परिदा, महाराष्ट्र से उदय भट्ट, छत्तीसगढ़ से बृजेंद्र तिवारी, तमिलनाडु से शंकर पांडियन, उत्तर प्रदेश से अनिल वर्मा, पश्चिम बंगाल से एन बनर्जी, झारखंड से गीता मंडल, उत्तराखंड से के के बोरा, दिल्ली से सुचिता डे, कश्मीर से निर्दोष उप्पल, पंजाब से राजविंदर सिंह राणा, और बिहार से रणविजय कुमार, एसके शर्मा, श्यामलाल प्रसाद आदि शामिल थे।

इस बैठक में मजदूरों को एकजुट कर मोदी सरकार के खिलाफ व्यापक संघर्ष और वातावरण बनाने पर गहन विचार-विमर्श जारी है। 

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