नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उनके घर के पास जले हुए नोटों के टुकड़े मिलने और नकदी बरामदगी के आरोपों ने इस मामले को और रहस्यमयी बना दिया है। इस घटना की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है, जिसने तीन सदस्यीय समिति बनाकर जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, “हमें समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। सच जल्द सामने आएगा।”
क्या है पूरा मामला?
14 मार्च 2025 को जज यशवंत वर्मा के घर में अचानक आग लग गई। उस वक्त जज घर पर मौजूद नहीं थे। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को वहां कुछ ऐसा मिला, जिसने सबको हैरान कर दिया—नकदी के जले हुए टुकड़े। इसके बाद सफाई कर्मचारी इंद्रजीत ने बताया, “हम 4-5 दिन पहले सड़क पर कूड़ा उठा रहे थे। तभी हमें 500 रुपये के जले हुए नोट के छोटे-छोटे टुकड़े मिले। हमें नहीं पता कि आग कहां से लगी, लेकिन ये टुकड़े उसी दिन मिले थे।” इस खुलासे के बाद सवाल उठने लगे कि क्या ये नकदी जज के घर से जुड़ी है?
सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
इस गंभीर मामले को देखते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तुरंत कदम उठाया। उन्होंने 22 मार्च को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की जज अनु शिवरामन की तीन सदस्यीय समिति बनाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस मामले की गहन जांच की जरूरत बताई गई है।
जज वर्मा का जवाब: “मुझे फंसाया जा रहा है”
जज यशवंत वर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “न तो मैंने और न ही मेरे परिवार ने कभी स्टोररूम में कोई नकदी रखी। ये सब मुझे बदनाम करने की साजिश है।” जज ने बताया कि जिस जगह आग लगी, वह एक आउटहाउस था, न कि उनका मुख्य घर जहां वे और उनका परिवार रहते हैं। उन्होंने इन आरोपों की कड़ी निंदा की और कहा कि सच जल्द सामने आएगा।
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जज वर्मा को निर्देश दिया कि वे अपने फोन के सभी संदेश, बातचीत और डेटा सुरक्षित रखें, ताकि जांच में कोई बाधा न आए।
कानून मंत्री का बयान
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इंफाल में पत्रकारों से कहा, “ये मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है। तीन सदस्यीय समिति इसकी जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही हम कुछ कह सकते हैं।” मेघवाल उस वक्त मणिपुर में नालसा के एक कार्यक्रम में थे, जहां सुप्रीम कोर्ट के पांच जज भी मौजूद थे। उन्होंने मणिपुर में शांति बहाली की योजनाओं पर भी चर्चा की और कहा कि संसद में इस मुद्दे पर विस्तार से बात होगी।
लोगों के मन में सवाल
ये घटना न सिर्फ कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बनी है, बल्कि आम लोगों के मन में भी कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर जज के घर से नकदी कैसे मिली? क्या ये सचमुच साजिश है या कुछ और? सफाई कर्मचारी इंद्रजीत की सादगी भरी बातें और जज वर्मा का भावुक जवाब इस मामले को और संवेदनशील बना रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। तब तक देश की नजरें इस जांच पर टिकी हैं। ये मामला न सिर्फ न्यायपालिका की साख से जुड़ा है, बल्कि हर उस इंसान को छू रहा है जो सच और न्याय की उम्मीद करता है। क्या ये एक साजिश है या हकीकत? जवाब का इंतजार हर किसी को है।
Recent Comments