कोरबा/दीपका (पब्लिक फोरम)। नगर पालिका परिषद दीपका में सार्वजनिक निधि के दुरुपयोग और शासकीय संपत्तियों पर अवैध कब्जे के दो गंभीर मामले सामने आए हैं। नेता प्रतिपक्ष हर्षित देवी राजपूत ने 8 जून 2026 को जिला कलेक्टर कोरबा को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जनप्रतिनिधि जनसेवा के नाम पर स्वीकृत राशि का उपयोग अपने निजी हितों के लिए कर रहे हैं, और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
पार्षद निधि से निजी घरों में बोरवेल
पहले मामले में राजपूत ने साक्ष्य सहित शिकायत दर्ज कराई है कि नगर पालिका दीपका के वार्ड क्रमांक 04, 05 और 18 में सार्वजनिक उपयोग के लिए स्वीकृत पार्षद निधि से बोरवेल खनन का काम निजी आवासों पर कराया गया। सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाले नलकूप पार्षदों के अपने घरों में स्थापित कर दिए गए।
उन्होंने कहा, “जब वार्ड की जनता पानी के लिए परेशान है, तब जनप्रतिनिधि टैक्स की रकम से अपने घरों को सुविधासंपन्न बना रहे हैं। यह बंदरबांट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधित्व के मूल उद्देश्य के साथ विश्वासघात भी है। पार्षद निधि का एकमात्र उद्देश्य वार्ड के नागरिकों की बुनियादी जरूरतें पूरी करना है – उसे निजी लाभ के लिए मोड़ना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
20 साल से बंद बस स्टैंड बना माफियाओं का ठिकाना
दूसरे मामले में नेता प्रतिपक्ष ने वार्ड क्रमांक 10 स्थित बस स्टैंड की बदहाली को लेकर प्रशासन को घेरा। उनके अनुसार यह बस स्टैंड पिछले दो दशकों से पूरी तरह निष्क्रिय पड़ा है। जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा।
इस निष्क्रियता का फायदा उठाते हुए कोल और कबाड़ माफियाओं ने परिसर की दुकानों सहित पूरे बस स्टैंड क्षेत्र पर अवैध कब्जा जमा लिया है। वर्तमान में यह जगह शराब पीने और असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन चुकी है। राजपूत ने आरोप लगाया कि नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी यह सब जानते हुए भी कोई कदम नहीं उठा रहे।
एक सार्वजनिक परिवहन सुविधा का इस तरह दशकों तक उपेक्षित रहना और फिर उस पर माफियाओं का कब्जा होना — यह स्थानीय शासन की विफलता का स्पष्ट उदाहरण है।
पावती क्रमांक 25 के साथ शिकायत दर्ज
दोनों शिकायतें 8 जून 2026 को कलेक्टर कार्यालय कोरबा में विधिवत दर्ज कराई गई हैं, जिनकी पावती पत्र क्रमांक 25 प्राप्त हुई है। राजपूत ने कलेक्टर से मांग की है कि वे स्वयं या वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भेजकर दोनों स्थलों का भौतिक निरीक्षण (Spot Inspection) कराएं, दोषी पार्षदों एवं अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए, और बस स्टैंड परिसर को अतिक्रमण मुक्त किया जाए।
उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका और जिला प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे जनता के साथ मिलकर सड़कों पर उतरने और आंदोलन करने को बाध्य होंगी।
दीपका में सामने आए ये दोनों मामले एक बड़े सवाल को जन्म देते हैं – जब जनप्रतिनिधि ही जनता की संपत्ति का दुरुपयोग करने लगें और सरकारी इमारतें माफियाओं का अड्डा बन जाएं, तो जवाबदेही की व्यवस्था कहाँ खड़ी है? लिखित शिकायत और पावती महज पहला कदम है – असली परीक्षा अब प्रशासन की है।





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