रविवार, मार्च 1, 2026
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फागुन का मल्हार

फागुन का त्योहार,
रंगों की फुहार,
रंगहीन जीवन में भर देता
आनंद अपार।

आम्र-डालियों पर झूम उठे बौर,
मधुमास गाए नव जीवन का तराना,
मानो धरती और अम्बर मिलकर
मना रहे हों होली का उत्सव सुहाना।

रंगों की रागिनी,
हर्ष की फुहार,
प्रेम-सुगंध से महके हर द्वार,
फागुन का यह मधुर मल्हार
भर दे जीवन में नव उजियार।

फागुन का त्योहार,
रंगों की फुहार,
रंगहीन जीवन में भर देता
आनंद अपार।

लाल रंग नारी के सुहाग का,
हरा वसुंधरा के सौभाग्य का सार,
सफेद शांति का पावन संदेश,
पीला आशा का उजला संसार।

हृदय में उमड़ती खुशियों की धार,
सुख-शांति-समृद्धि का विस्तार,
सभी रंगों का संगम लेकर
आया है मौसम का मल्हार।

फागुन का त्योहार,
रंगों की फुहार,
रंगहीन जीवन में भर देता
आनंद अपार।

प्रकृति भी खेले होली निराली,
देखो उसका अनुपम श्रृंगार-
पलाश का केसरिया दहके,
सेमल का चटक लाल।
सरसों की पीली चूनर ओढ़े
धरती करे सोलह शृंगार।

फागुन का त्योहार,
रंगों की फुहार,
रंगहीन जीवन में भर देता
आनंद अपार।

हेमलता जायसवाल झारसुगुडा, ओड़िशा

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