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रविवार, फ़रवरी 22, 2026
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बापू की पुण्यतिथि पर खुली शराब की दुकानें, भड़की युवा कांग्रेस; ‘रघुपति राघव’ गाकर आबकारी मंत्री का पुतला फूंका

कोरबा (पब्लिक फोरम)। क्या शराब का राजस्व राष्ट्रपिता के सम्मान से बड़ा है? यह सवाल कोरबा की सड़कों पर तब गूंज उठा जब 30 जनवरी, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के दिन भी शहर में शराब की दुकानें खुली रहीं। जिस दिन पूरा देश बापू के सत्य और अहिंसा के संदेश को याद कर रहा था, उसी दिन मदिरा प्रेमियों के लिए ‘मयखाने’ खुले रहने पर युवा कांग्रेस का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे बापू का अपमान बताते हुए निहारिका और टीपी नगर स्थित शराब दुकानों के सामने जमकर बवाल मचाया और ‘रघुपति राघव राजाराम’ का भजन गाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

भजन और नारेबाजी के बीच विरोध का अनूठा तरीका

शुक्रवार को जब देश गांधीजी के बलिदान को याद कर रहा था, कोरबा के निहारिका और टीपी नगर इलाके में नजारा कुछ अलग था। युवा कांग्रेस के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में महात्मा गांधी की तस्वीर लेकर शराब दुकानों के सामने जमा हो गए। एक तरफ शराब की बिक्री जारी थी, तो दूसरी तरफ युवा नेता गांधी जी की तस्वीर हाथ में थामे “रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम” का गायन कर रहे थे।
माहौल तब और गरमा गया जब कार्यकर्ताओं ने आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने पुतले पर सांकेतिक रूप से ‘दारू मंत्री लखन लाल देवांगन’ लिख रखा था। उनका कहना था कि सरकार ने नैतिकता को ताक पर रखकर यह फैसला लिया है।

शुष्क दिवस (Dry Day) के नियमों में बदलाव पर सियासत

युवा कांग्रेस के शहर अध्यक्ष राकेश पंकज ने इस मौके पर सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब की दुकानें खुली हैं।”

श्री पंकज ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखते हुए बताया कि:-

🔹पहले, साल में 07 दिन शराब की दुकानें बंद (शुष्क दिवस) रहती थीं।
🔹भाजपा सरकार ने अब इसे घटाकर मात्र 04 दिन कर दिया है।
🔹अब केवल गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गांधी जयंती (2 अक्टूबर) और गुरु घासीदास जयंती (18 दिसंबर) को ही दुकानें बंद रहेंगी।
🔹हैरानी की बात है कि 30 जनवरी (गांधी पुण्यतिथि), होली और मोहर्रम जैसे दिनों को इस सूची से बाहर कर दिया गया है।

“गांधी के सिद्धांतों से भाजपा का लेना-देना नहीं”

विरोध प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी खूब चले। राकेश पंकज ने आरोप लगाया कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिशों के बाद, अब उनकी पुण्यतिथि पर शराब परोसना यह साबित करता है कि भाजपा को गांधीवादी विचारधारा से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा, “सत्य, अहिंसा और नशामुक्ति के पुजारी के शहादत दिवस पर शराब बेचना, उनके सिद्धांतों का खुला मखौल है। यह सरकार केवल दिखावे के लिए बापू को याद करती है।”

क्या राजस्व ही सबकुछ है?

युवा कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष विवेक श्रीवास ने एक मार्मिक सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत में त्योहार और महापुरुषों की जयंतियां केवल छुट्टियां नहीं, बल्कि एक भावना हैं। 30 जनवरी, होली, मोहर्रम जैसे दिनों पर शराब बंदी की एक सामाजिक परंपरा रही है।
विवेक श्रीवास ने कहा, “अगर सरकार पुरानी परंपराओं को निभाती रहती तो क्या बिगड़ जाता? क्या छत्तीसगढ़ की सरकार अब केवल शराब बिक्री के भरोसे ही चल रही है?” कांग्रेस परिवार ने एक स्वर में मांग की है कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय को तत्काल वापस ले।

मुनाफे और नैतिकता के बीच की लकीर
इस घटना ने एक गंभीर विमर्श को जन्म दिया है। महात्मा गांधी जीवन भर नशामुक्ति की वकालत करते रहे। उनकी पुण्यतिथि को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो संयम और शोक का दिन है। ऐसे में, महज कुछ राजस्व के लिए शराब की दुकानें खोलना न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि हम अपनी भावी पीढ़ी को कौन से आदर्श सौंप रहे हैं। क्या हम इतने व्यावहारिक हो गए हैं कि राष्ट्रपिता के सम्मान और शराब के कारोबार के बीच का अंतर भी भूल गए?

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