नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला की संप्रभुता पर किए गए हमले के विरोध में 4 जनवरी को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर संयुक्त वाम पार्टियों के आह्वान पर जोरदार विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे खुला साम्राज्यवादी हस्तक्षेप बताते हुए वेनेज़ुएला की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की और अमेरिकी नीतियों की कड़ी निंदा की।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पहले ही अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी है और उसी दिशा में देश के मज़दूर-किसानों के अधिकारों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में लागू किए गए मज़दूर-विरोधी श्रम कोड कानून महज़ आंतरिक सुधार नहीं, बल्कि वैश्विक पूंजी और साम्राज्यवादी दबावों का परिणाम हैं, जिनका सीधा असर श्रमिकों की सुरक्षा, रोज़गार और सौदेबाजी की ताकत पर पड़ रहा है।

प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि वेनेज़ुएला पर हमला केवल एक देश की संप्रभुता पर प्रहार नहीं है, बल्कि उन तमाम देशों के लिए चेतावनी है जो स्वतंत्र नीतियों और सामाजिक न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं। वाम नेताओं ने स्पष्ट किया कि साम्राज्यवादी हस्तक्षेप का प्रतिरोध अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के बिना संभव नहीं है।

इसी क्रम में केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों के आह्वान पर 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने मज़दूरों, किसानों और आम जनता से इस हड़ताल में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक और संप्रभु नीतियों की रक्षा से जुड़ा है। प्रदर्शन के अंत में “अमरीकी साम्राज्यवाद हो बर्बाद” और “वेनेज़ुएला की क्रांतिकारी जनता जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ वाम दलों ने यह संदेश दिया कि साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष और मज़दूर-किसान अधिकारों की लड़ाई एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि एक ही व्यापक आंदोलन के हिस्से हैं।





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