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कोरबा: बालकोनगर में 20 साल पुराने लघु उद्यमियों को उजाड़ने की तैयारी, मिला नोटिस, हड़कंप

मंत्री के निर्देश दरकिनार? छोटे दुकानदारों ने लगाई बिना विस्थापन पुनर्व्यवस्था की गुहार

कोरबा (पब्लिक फोरम)। बालको नगर स्थित मिनीमाता चौक, सेक्टर-3, वार्ड क्रमांक 43 के लघु उद्यमियों ने जोन कार्यालय, नगर पालिक निगम कोरबा को 17 जुलाई 2026 को एक सामूहिक आवेदन सौंपकर हाल ही में जारी अतिक्रमण नोटिस को निरस्त करने और बिना भेदभाव के विधिसम्मत पुनर्व्यवस्था की मांग की है। यह नोटिस नगर पालिक निगम द्वारा 14 जुलाई 2026 को जारी संदर्भ फा.क्र./राजस्व शाखा/2026-27/Q, बालको जोन के अंतर्गत दिया गया था।

आवेदन में व्यापारियों ने बताया कि वे बीते “लगभग 20 वर्षों” से इसी स्थान पर छोटी दुकानों और गुमटियों के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और यही व्यवसाय उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। उनका कहना है कि इस पूरी अवधि में बालको टाउनशिप प्रबंधन और नगर निगम प्रशासन को उनकी उपस्थिति की जानकारी रही है, और समय-समय पर हुए निरीक्षणों के दौरान भी प्रशासन उनकी गतिविधियों से पूरी तरह अवगत रहा है। ऐसे में निगम प्रशासन के द्वारा अचानक उन्हें कथित अतिक्रमणकारी बताते हुए नोटिस थमाया जाना उनके लिए गहरा मानसिक और आर्थिक आघात है।

पृष्ठभूमि: व्यापारियों ने आवेदन में विशेष रूप से उल्लेख किया कि 17 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्यिक कर (आबकारी), श्रम एवं उद्योग मंत्री “लखन लाल देवांगन” ने बालको के प्रशासनिक प्रमुख कैप्टन धनंजय मिश्रा को निर्देश दिया था कि मिनीमाता चौक के लघु व्यापारियों को हटाने के बजाय, अन्य छोटे व्यापारियों की तरह इसी क्षेत्र में उचित स्थान देकर व्यवस्थित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि निगम का मौजूदा नोटिस मंत्री जी के इस निर्देश की भावना के विपरीत है।

आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बालको नगर वार्ड क्रमांक 43 के ये लघु व्यापारी किसी अवैध लाभ या विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल समान परिस्थितियों में कार्यरत अन्य विक्रेताओं जैसा ही न्यायसंगत व्यवहार चाहते हैं। उन्होंने संविधान के “अनुच्छेद 14” (समानता का अधिकार) और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय में प्रभावित लोगों की आजीविका और मानवीय परिस्थितियों पर विचार आवश्यक है।

लघु उद्यमियों की मुख्य मांगें:
– नगर पालिका निगम के बालको जोन द्वारा जारी अतिक्रमण संबंधी नोटिस/आरोप पत्र तत्काल निरस्त किया जाए।
– 20 वर्षों से आजीविका अर्जित कर रहे सभी लघु व्यापारियों को बिना भेदभाव संरक्षण मिले।
– यदि स्थान परिवर्तन प्रशासनिक रूप से आवश्यक हो, तो पूर्व सूचना और आपसी सहमति से इसी क्षेत्र या समीपस्थ उपयुक्त स्थान पर विधिवत पुनर्व्यवस्थित किया जाए।
– मंत्रीजी के पूर्व निर्देशों और समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए न्यायोचित निर्णय लिया जाए।

आवेदन की प्रतिलिपि मंत्री लखन लाल देवांगन, जिला कलेक्टर कोरबा, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), महापौर व आयुक्त नगर पालिक निगम कोरबा, पुलिस अधीक्षक कोरबा, बालको प्रशासनिक प्रमुख, वार्ड पार्षद हितानंद अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और थाना प्रभारी बालकोनगर को भी भेजी गई है, ताकि आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित हो सके।

लघु उद्यमी संगठन ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रभावी ‘पथ विक्रेता (आजीविका का संरक्षण और पथ विक्रय का विनियमन) अधिनियम, 2014’ के तहत किसी भी लघु व्यवसायी को तब तक उजाड़ा नहीं जा सकता, जब तक कि टाउन वेंडिंग कमेटी (TWC) द्वारा उनका सर्वे न कर लिया जाए और उन्हें किसी ‘वेंडिंग जोन’ में व्यवस्थित रूप से पुनर्स्थापित न कर दिया जाए। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक बेदखली का यह नोटिस उक्त केंद्रीय अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।

स्थानीय स्तर पर देखा जाए तो यह मामला केवल कागजी नोटिस भर नहीं, बल्कि दर्जनों परिवारों की रोज़ी-रोटी से सीधे जुड़ा है। एक छोटी गुमटी चलाकर परिवार पालने वाले इन विक्रेताओं के लिए यह जगह महज दुकान नहीं, दो दशकों की मेहनत और पहचान है। यदि निगम प्रशासन बिना पुनर्व्यवस्था के नोटिस पर अमल करता है, तो इन छोटे व्यवसायियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि नगर निगम प्रशासन और बालको प्रबंधन मंत्री जी के पूर्व निर्देशों तथा समानता के सिद्धांत के अनुरूप कोई संवेदनशील और न्यायसंगत रास्ता निकालते हैं, या यह मामला भी बालको में जनहित के अन्य मामलों की तरह ही और लंबा खिंचता है।

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