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रविवार, फ़रवरी 15, 2026
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कोरबा: मनरेगा में गड़बड़ियों की जांच की मांग, जिला पंचायत अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप!

कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा जिले में मनरेगा योजना के तहत हो रहे विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मनरेगा गाइडलाइन्स का सही पालन न किए जाने की शिकायत की गई है और इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
जनपद पंचायत करतला की अध्यक्ष सुनीता देवी कंवर ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रमुख सचिव को शिकायत भेजी है, जिसमें मनरेगा के अधिनियमों का उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय, मनरेगा डिवीजन से इस मामले की गहन जांच कराने की अपील की है। शिकायत के साथ आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए गए हैं।

शिकायत के मुख्य बिंदु
जनपद अध्यक्ष सुनीता कंवर ने अपनी ऑनलाइन शिकायत (पंजीकरण संख्या: DORLD/E/2024/0690172) में बताया है कि कोरबा जिले में 412 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें विकास कार्यों के लिए पर्याप्त स्थान है। बावजूद इसके, जिला पंचायत कोरबा के सहायक परियोजना अधिकारी (APO) संदीप डिक्सेना पर आरोप है कि वे केवल उन्हीं ग्राम पंचायतों को मनरेगा योजना के तहत काम और भुगतान की स्वीकृति देते हैं, जो कथित तौर पर कमीशन देते हैं। बाकी ग्राम पंचायतों के भुगतान और कार्य स्वीकृतियां लंबित रखी गई हैं। आरोप है कि 1 अक्टूबर 2024 तक कई ग्राम पंचायतों का भुगतान अभी भी लंबित है, और इसके लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

अनियमितताओं के आरोप
1. मनरेगा के तहत निर्माण कार्यों में मटेरियल राशि का रेशियो 41% से 99% तक का बताया गया है, जो अधिनियम के विरुद्ध है।
2. जनपद पंचायत पाली में भूमि सुधार कार्यों में 102 परियोजनाओं के लिए समान राशि 87,000 रूपए स्वीकृत की गई है, जिसकी जांच की मांग की गई है।

3. कुछ ग्राम पंचायतों में सामग्री संबंधी कार्यों के लिए 20 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भुगतान किया गया है, जिसकी जांच होना आवश्यक है।

APO का क्या कहना है?
संदीप डिक्सेना ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह उनकी छवि को खराब करने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया कि कोई कमीशन नहीं लिया जा रहा है और जनपद अध्यक्ष सुनीता कंवर ने उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है। उनका कहना है कि कंवर के नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है और वे लिखित में यह देने को तैयार हैं कि उन्होंने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

इस मामले में शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है, जो अक्सर प्रशासनिक और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता की कमी का संकेत हो सकता है। मनरेगा जैसी योजनाएं, जो गरीब ग्रामीणों के लिए रोजगार का साधन हैं, में इस तरह की अनियमितताएं न केवल सरकारी प्रणाली पर सवाल उठाती हैं बल्कि उन लोगों के लिए भी चिंता का कारण बनती हैं, जिनका जीवन-निर्वाह इन योजनाओं पर निर्भर करता है। इसलिए, इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच बेहद जरूरी है ताकि दोषियों को सज़ा मिल सके और मनरेगा जैसी कल्याणकारी योजनाओं की साख बनी रहे।

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