कोरबा (पब्लिक फोरम)। साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी से आम नागरिकों को बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा ने पैरालीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पुलिस विभाग के साइबर विशेषज्ञों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों, सुरक्षित डिजिटल लेन-देन और साइबर अपराध की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकार मित्रों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में हुआ प्रशिक्षण
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष नीता यादव के निर्देशन में किया गया।
प्रशिक्षण में पुलिस विभाग के साइबर सेल के विशेषज्ञ विकेश्वर प्रताप सिंह और रवि कुमार चौबे ने पैरालीगल वॉलंटियर्स को साइबर अपराध के विभिन्न स्वरूपों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी। इसमें प्रबंध कार्यालय तथा विधिक सहायता क्लीनिक में नियुक्त पैरालीगल वॉलंटियर्स ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कैसे होती है ठगी?
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि साइबर अपराधी मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, फर्जी कॉल, संदेश और वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को निशाना बनाते हैं। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले लोग स्वयं को पुलिस अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद कथित जांच या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे धनराशि मांगी जाती है।
ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सतर्क रहना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड, एक बार इस्तेमाल होने वाला पासवर्ड (ओटीपी) या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
किसी व्यक्ति के केवल फोन या वीडियो कॉल पर स्वयं को सरकारी अधिकारी बताने से उसकी पहचान प्रमाणित नहीं हो जाती। इसलिए ऐसे दावों की स्वतंत्र रूप से संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यमों से पुष्टि करना आवश्यक है।
साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें शिकायत
प्रशिक्षण में साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर “1930” की जानकारी दी गई। ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने पर जल्द शिकायत करने से संबंधित लेन-देन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। पीड़ितों को साइबर अपराध की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।
इसके अलावा, मोबाइल फोन गुम होने या चोरी होने की स्थिति में उसके आईएमईआई नंबर के आधार पर संबंधित उपकरण को अवरुद्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की “सीईआईआर (CEIR)” व्यवस्था के उपयोग के बारे में बताया गया।
निजी फोटो और वीडियो की सुरक्षा पर भी जोर
प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल खातों और निजी सामग्री की सुरक्षा के उपायों पर भी चर्चा की गई। पैरालीगल वॉलंटियर्स को व्हाट्सऐप पर दो-चरणीय सत्यापन (टू-स्टेप वेरिफिकेशन) सक्रिय करने की सलाह दी गई, ताकि खाते की सुरक्षा मजबूत की जा सके।
निजी या अंतरंग तस्वीरों और वीडियो के बिना सहमति प्रसारित होने की आशंका या ऐसी सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए “StopNCII.org” की उपयोगिता के बारे में भी जानकारी दी गई। यह सेवा पात्र वयस्कों को उनकी अंतरंग तस्वीरों और वीडियो के अनधिकृत प्रसार को रोकने में सहायता करती है। हालांकि, यह इंटरनेट के हर मंच से सामग्री हटाने की गारंटी नहीं देती।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की पहल
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य पैरालीगल वॉलंटियर्स के माध्यम से साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाना है। अधिकार मित्र कानूनी सहायता और जागरूकता के कार्यों में लोगों को मार्गदर्शन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों और डिजिटल माध्यमों का सीमित अनुभव रखने वाले लोगों के लिए ऐसी जागरूकता उपयोगी हो सकती है। समय रहते सही जानकारी मिलने से लोग फर्जी कॉल, संदिग्ध संदेश और ऑनलाइन ठगी के जाल में फंसने से बच सकते हैं।
जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का मजबूत आधार
डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी सुरक्षा पर्याप्त नहीं है; नागरिकों को अपने अधिकारों, शिकायत के माध्यमों और डिजिटल सावधानियों की जानकारी होना भी जरूरी है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम नागरिकों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि यहां मिली जानकारी कितने लोगों तक पहुंचती है और कितने नागरिक संभावित ठगी से स्वयं को बचा पाते हैं।







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