back to top
गुरूवार, जनवरी 22, 2026
होमआसपास-प्रदेशकोरबा: माता सावित्रीबाई फुले व जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर 3...

कोरबा: माता सावित्रीबाई फुले व जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर 3 जनवरी को ऐतिहासिक कार्यशाला; आदिवासी अधिकार और स्वशासन पर होगा मंथन

कोरबा (पब्लिक फोरम)। भारत की प्रथम महिला अध्यापिका माता सावित्रीबाई फुले और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के प्रणेता जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर 3 जनवरी 2026, शनिवार को कोरबा स्थित आदिवासी शक्ति पीठ में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और संविधान की रक्षा जैसे मूलभूत प्रश्नों पर गंभीर विमर्श किया जाएगा।

कार्यशाला का विषय “जल-जंगल-जमीन, संस्कृति व संविधान की रक्षा तथा पूर्वजों के सपनों की आदिवासी सत्ता के लिए जागरूक और संगठित होना” निर्धारित किया गया है। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम आदिवासी समाज में संवैधानिक अधिकारों को लेकर नव-जनचेतना अभियान के रूप में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगा।

कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एवं आदिवासी सत्ता मासिक पत्रिका के संस्थापक-संपादक के. आर. शाह होंगे। वे माता सावित्रीबाई फुले और जयपाल सिंह मुंडा के जीवन, संघर्ष और दर्शन के आलोक में आदिवासी स्वशासन, ‘मावा नाटे मावा राज’ और संवैधानिक प्रावधानों की प्रासंगिकता पर विचार रखेंगे।

विशिष्ट वक्ताओं में परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा के सांस्कृतिक सचिव इंजीनियर रूपेन्द्र सिंह पैकरा तथा प्रथम विश्व शक्तिपीठ, कोरबा के सचिव इंजीनियर सुभाष भगत शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष के. आर. राज करेंगे।

आयोजकों ने बताया कि माता सावित्रीबाई फुले ने 19वीं शताब्दी में महिलाओं की शिक्षा की ज्योत जलाकर सामाजिक क्रांति की नींव रखी, वहीं जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा के सदस्य के रूप में आदिवासियों के जल जंगल जमीन के अधिकारों को पांचवीं और छठी अनुसूची के माध्यम से संवैधानिक संरक्षण दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनका जीवन आदिवासी स्वाभिमान, संघर्ष और लोकतांत्रिक अधिकारों की प्रेरक मिसाल है।

कार्यशाला के माध्यम से आदिवासी समाज को अपने ऐतिहासिक संघर्षों, बलिदानों और संवैधानिक अधिकारों के प्रति संगठित एवं जागरूक करने का आह्वान किया गया है। आयोजकों का कहना है कि माता सावित्रीबाई फुले और जयपाल सिंह मुंडा का विचार-दर्शन आज भी आदिवासी समाज को वैचारिक क्रांति, स्वशासन और ‘आदिवासी सत्ता’ की दिशा में आगे बढ़ने का मार्गदर्शन करता है।

इस अवसर पर आदिवासी समाज के सभी वर्गों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी ऐतिहासिक विरासत को सशक्त बनाने और जल जंगल जमीन, संस्कृति व संविधान की रक्षा के संकल्प को मजबूत करने की अपील की गई है।

विशेष सूचना: नववर्ष के अवसर पर 1 जनवरी 2026 को प्रातः 7 से 8 बजे तक आदिवासी शक्ति पीठ, कोरबा में देवधामी, आदिशक्ति, प्रकृति शक्ति एवं पुरखा शक्तियों की सामूहिक आराधना, हुमग्रास एवं सुमरनी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजक: छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद, जिला-कोरबा (छत्तीसगढ़)

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments