कोरबा (पब्लिक फोरम)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा 13 दिसंबर को वर्ष 2025 की अंतिम हाइब्रिड नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला एवं तहसील स्तर पर आयोजित इस लोक अदालत में कुल 4 लाख 24 हजार 702 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के अध्यक्ष श्री संतोष शर्मा की अध्यक्षता और मार्गदर्शन में संपन्न हुई इस लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
प्रकरणों का विवरण
लोक अदालत में कुल 4 लाख 87 हजार 528 प्रकरण प्रस्तुत किए गए थे। इनमें न्यायालयों में लंबित 7,116 प्रकरण और प्री-लिटिगेशन के 48 प्रकरण शामिल थे। राजस्व संबंधी मामलों, प्री-लिटिगेशन प्रकरणों और न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को समझौते के आधार पर सुलझाया गया।
जिला न्यायाधीश ने वितरित किए उपकरण
लोक अदालत के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने समाज कल्याण विभाग के सहयोग से दिव्यांग और जरूरतमंद हितग्राहियों को इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल, बैसाखी और कर्ण यंत्र जैसे उपकरण वितरित किए। इसके साथ ही शासकीय जिला चिकित्सालय कोरबा और जिला आयुष अधिकारी कोरबा द्वारा स्वास्थ्य शिविर लगाकर उपस्थित पक्षकारों की निःशुल्क जांच और आवश्यक उपचार की व्यवस्था की गई।
पर्यावरण संरक्षण की पहल
वन विभाग ने भी इस अवसर पर सहयोग प्रदान किया। समझौते के आधार पर अपने प्रकरणों का निराकरण कराने वाले पक्षकारों को प्रोत्साहन स्वरूप पौधे वितरित किए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में श्रीमती नीता यादव (न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय), श्रीमती गरिमा शर्मा (द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश), सुनील कुमार नंदे (तृतीय अपर जिला न्यायाधीश), अविनाथ तिवारी (श्रम न्यायाधीश), सुश्री सीमा प्रताप चंद्रा (जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी), कुमारी मयूरा गुप्ता (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश उपस्थित रहे।
इसके अलावा कुमारी डिंपल (सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण), गणेश कुलदीप (अध्यक्ष, जिला अधिवक्ता संघ), रोहित कुमार राजवाड़े (चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल) समेत अधिवक्ता संघ के अन्य पदाधिकारी और न्यायालयीन कर्मचारी भी मौजूद थे।
यह लोक अदालत न्याय प्रणाली में तेजी लाने और आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।





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