कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा में भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) के खिलाफ आरोपों ने प्रशासनिक चुप्पी और कॉरपोरेट प्रभाव के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने तीखे शब्दों में कहा है कि कोरबा में निर्वाचित सरकार नहीं, बल्कि कॉरपोरेट कंपनी का राज चल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके संरक्षण में बालको प्रबंधन स्वयं को कानून, संविधान और प्रशासन से ऊपर मान रहा है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि बालको टाउनशिप में बीते 40–45 वर्षों से ठेला-गुमटी, पान दुकान, मोची, दर्जी, नाई, रजाई-गद्दा निर्माण जैसे छोटे व्यवसायों के सहारे जीवन यापन कर रहे गरीब परिवारों को नोटिस देकर हटाना सीधे-सीधे गरीबों की रोज़ी पर हमला है। यह न केवल अमानवीय है, बल्कि सामाजिक न्याय की मूल भावना के विरुद्ध भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बालको प्रबंधन को यह भ्रम हो गया है कि वह सरकार से ऊपर है। गरीबों की रोज़ी छीनना, श्रमिकों का अपमान करना और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाना—इसी को विकास का मॉडल बना लिया गया है। उनके अनुसार, बीते दो वर्षों से ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों का लगातार मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है और श्रम कानूनों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। अनेक शिकायतों के बावजूद शासन-प्रशासन की चुप्पी संदेह को और गहरा करती है।
पूर्व मंत्री ने विस्तार परियोजना की जनसुनवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक किसी भी स्थानीय युवक को परियोजना विस्तार में रोजगार नहीं मिला। उन्होंने इसे केवल वादाखिलाफी नहीं, बल्कि जनता के साथ धोखा और प्रशासनिक मिलीभगत का प्रमाण बताया।

जयसिंह अग्रवाल ने बालको पर कई गंभीर आरोप गिनाए—कई एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्ज़ा, बिना अनुमति हजारों पेड़ों की कटाई, दशकों पुरानी सार्वजनिक सड़क को बंद करना, इंदिरा मार्केट की ड्रेनेज व्यवस्था को नुकसान पहुँचाना, शांतिनगर में बिना मुआवजा और रोजगार दिए कूलिंग टॉवर का निर्माण, एनजीटी नियमों के विरुद्ध फ्लाई ऐश का निपटान। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामलों के बावजूद कार्रवाई शून्य है।
उन्होंने एक चौंकाने वाला तथ्य साझा करते हुए बताया कि उनके पत्र के बाद डीएफओ ने जी-9 परियोजना को रोका था, लेकिन मात्र दो दिनों के भीतर “ऊपर से आए आदेश” के बाद काम फिर शुरू करा दिया गया। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि बालको के पीछे कौन-कौन से ताकतवर संरक्षण मौजूद हैं।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने इन सभी मामलों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री तक 14 पत्र भेजे, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब गरीब का ठेला हटाना होता है, तब प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता है, लेकिन जब कॉरपोरेट कानून तोड़ता है, तब सभी चुप्पी साध लेते हैं।
पूर्व मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छोटे व्यवसायियों को हटाने की कार्रवाई तत्काल नहीं रोकी गई, श्रमिकों को न्याय नहीं मिला और बालको की अवैधानिक गतिविधियों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मुद्दा सड़क से सदन तक उठेगा। आंदोलन होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और बालको प्रबंधन की होगी।
जयसिंह अग्रवाल ने मांग की कि छोटे व्यवसायियों को दिए गए सभी नोटिस तत्काल रद्द किए जाएँ, श्रमिक उत्पीड़न और जनसुनवाई उल्लंघन की उच्चस्तरीय जांच हो, बालको के अवैध अतिक्रमण और पर्यावरण अपराधों पर एफआईआर दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा स्थानीय जनता, श्रमिकों और गरीब व्यवसायियों को उनका संवैधानिक संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।





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