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कोरबा की कटघोरा उपजेल में बंदियों के अधिकार और विधिक सहायता की जांच

जेल निरीक्षण में भोजन, स्वास्थ्य और मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था पर जोर

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कोरबा (पब्लिक फोरम)। कटघोरा उपजेल में बंदियों को मिल रही मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और निःशुल्क विधिक सहायता की स्थिति की समीक्षा की गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती नीता यादव की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट जेल विजिटर्स बोर्ड ने जेल का सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बैरकों से लेकर रसोईघर, स्वास्थ्य केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था और लीगल एड क्लीनिक की कार्यप्रणाली का जायजा लिया गया।
यह निरीक्षण उच्चतम न्यायालय के रिट याचिका (सिविल) क्रमांक 1404/2023, सुकन्या संस्था बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में 3 अक्टूबर 2024 को पारित निर्णय के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया। इसका उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना था।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा की अध्यक्ष श्रीमती नीता यादव की अध्यक्षता में गठित डिस्ट्रिक्ट जेल विजिटर्स बोर्ड ने उपजेल कटघोरा के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया।

भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की हुई समीक्षा
निरीक्षण के दौरान बंदियों के बैरकों, रसोईघर, स्वास्थ्य केंद्र और स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने जेल में उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता और पोषण संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
स्वास्थ्य सेवाओं के तहत नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता और चिकित्सकीय सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा बंदियों के लिए संचालित शिक्षा कार्यक्रमों और खेलकूद जैसी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली गई।
निरीक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि जेल में बंद लोगों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं, इसकी स्थिति समझी जाए।

लीगल एड क्लीनिक की कार्यप्रणाली की जांच
जेल में संचालित लीगल एड क्लीनिक की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसका उद्देश्य यह देखना था कि जरूरतमंद बंदियों को समय पर निःशुल्क कानूनी सहायता मिल रही है या नहीं तथा अधिवक्ता नियुक्ति सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी उन्हें आसानी से उपलब्ध है या नहीं।
इस दौरान बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता, अधिवक्ता नियुक्ति और विभिन्न कानूनी योजनाओं के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया गया।

स्वच्छ वातावरण और नियमित स्वास्थ्य जांच के निर्देश
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती नीता यादव ने जेल अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों को बंदियों के लिए स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
उन्होंने बंदियों के बीच विधिक सहायता से संबंधित जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि जरूरतमंद बंदी अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

बंदियों से कहा—खुद को असहाय न समझें
निरीक्षण के दौरान संक्षिप्त विधिक जागरूकता शिविर भी आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा की ओर से बंदियों को संबोधित करते हुए कहा गया कि वे स्वयं को असहाय न समझें। जरूरत पड़ने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
जेल में निरुद्ध व्यक्ति के लिए कानूनी प्रक्रिया को समझना और अपनी ओर से उपलब्ध विधिक अधिकारों का उपयोग कर पाना महत्वपूर्ण है। ऐसे में जेल परिसर में विधिक सहायता व्यवस्था की प्रभावशीलता बंदियों की न्याय तक पहुंच से सीधे जुड़ी हुई है।

संयुक्त निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोरबा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा, सुश्री मयूरा गुप्ता, कटघोरा एसडीओपी विजय सिंह, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ एससी पांडेय, डॉ. रश्मि, सहायक जेल अधीक्षक कटघोरा, फार्मासिस्ट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सहित जेल का स्टाफ मौजूद रहा।

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