रायपुर (पब्लिक फोरम)। कल देश की सड़कों पर जो मंजर दिखा, वह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि सत्ता की नीतियों के खिलाफ आम आदमी और मज़दूर वर्ग का एक संगठित विद्रोह था। 12 फरवरी 2026 को हुई देशव्यापी आम हड़ताल की अभूतपूर्व सफलता पर AICCTU (ऐक्टू) छत्तीसगढ़ ने राज्य के मेहनतकश वर्ग को ‘क्रांतिकारी बधाई’ देते हुए इसे लोकतंत्र को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
सड़कों पर उतरा जनसैलाब, थमी रफ्तार
इस हड़ताल का असर इतना व्यापक था कि औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर खेतों तक काम पूरी तरह ठप रहा। इंडस्ट्रियल वर्कर्स, असंगठित क्षेत्र के कामगारों और खेत मज़दूरों के एकजुट होने से न केवल परिवहन व्यवस्था चरमरा गई, बल्कि कई राज्यों में पूर्ण ‘बंद’ जैसी स्थिति बनी रही। रेलवे और रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों ने भी इस आंदोलन को अपना पुरजोर समर्थन देकर यह स्पष्ट कर दिया कि नाराज़गी गहरी और व्यापक है।
क्यों आंदोलित है देश का मज़दूर?
AICCTU के राज्य महासचिव बृजेन्द्र तिवारी ने अपने बयान में कहा कि यह हड़ताल केंद्र सरकार की विनाशकारी नीतियों के खिलाफ एक “करारा जवाब” है। आंदोलन की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:-
🔸4 लेबर कोड: मज़दूरों ने इसे “गुलामी का दस्तावेज” करार देते हुए रद्द करने की मांग की है।
🔸MGNREGA का खात्मा: मनरेगा की जगह लाए गए VB-GRAMG एक्ट को लेकर ग्रामीण मज़दूरों में भारी रोष है।
🔸जनविरोधी बिल: बिजली बिल, बीज बिल और ‘ट्रंप ट्रेड डील’ जैसे समझौतों को देश की संप्रभुता पर हमला बताया गया है।
🔸विभाजनकारी राजनीति: सत्ता द्वारा समाज को बांटने की कोशिशों के खिलाफ मज़दूर वर्ग ने एकजुटता का परिचय दिया है।
“यह तो बस शुरुआत है”
ऐक्टू ने स्पष्ट किया है कि यह हड़ताल किसी संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और निर्णायक लड़ाई का आगाज़ है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और अन्य जन-संगठनों की भागीदारी ने इस आंदोलन को और भी मजबूती दी है।
“संसद से सड़क तक आज मेहनतकशों की आवाज़ गूंज रही है। मोदी सरकार के जनविरोधी कानूनों को जब तक रद्द नहीं किया जाता, तब तक यह दृढ़ संघर्ष और तेज़ होगा।” – बृजेन्द्र तिवारी, राज्य महासचिव, AICCTU.
यह हड़ताल भारतीय मज़दूर वर्ग के इतिहास में एक अहम पड़ाव साबित हुई है, जिसने यह साफ कर दिया है कि रोटी और अधिकार की इस लड़ाई में अब कोई पीछे मुड़ने वाला नहीं है।





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