कोरबा (पब्लिक फोरम)। जिले में महिला एवं बाल विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने रविवार को स्पष्ट संदेश दिया – आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का मंच हों। जिला सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने विभागीय योजनाओं की गहन पड़ताल करते हुए अधिकारियों को जवाबदेही के दायरे में खड़ा किया।
कलेक्टर का सबसे प्रमुख निर्देश कुपोषण उन्मूलन को लेकर रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में अनिवार्य रूप से भेजा जाए। घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करने और अतिरिक्त पौष्टिक आहार की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया। श्री दुदावत ने सुपोषण चौपाल के माध्यम से ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों और जनप्रतिनिधियों को शामिल करते हुए पोषण जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया।

आंगनबाड़ी केंद्रों के समय पर संचालन और बच्चों को निर्धारित अनुसार गर्म नाश्ता-भोजन देने के साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों को नियमित संचालित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने भवनविहीन और जर्जर केंद्रों की 15 दिनों में सूची मांगी। उनका स्पष्ट आदेश था – बारिश से पहले अधिकतम केंद्रों को नए भवनों में स्थानांतरित किया जाए। पानी टंकियों को जल स्रोत से जोड़ने और शौचालय व्यवस्था दुरुस्त करने की जिम्मेदारी जिला पंचायत सीईओ को सौंपी गई।

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के क्रियान्वयन में गंभीरता की अपेक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिया कि परियोजना अधिकारी एएनसी पंजीयन की जानकारी लेकर हितग्राहियों को समयबद्ध लाभ सुनिश्चित करें। महतारी वंदन योजना में ई-केवाईसी कार्य दस दिनों में पूर्ण करने और भुगतान अटकने की स्थिति में तत्काल समाधान का आदेश दिया गया।
बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड और बाल देखरेख संस्थाओं की समीक्षा में कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। शासकीय मानकों का अनिवार्य पालन, साफ-सफाई और भोजन वितरण में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। बच्चों के आधार, जाति प्रमाण पत्र और आयुष्मान कार्ड बनवाने के साथ सुकन्या समृद्धि योजना में बालिकाओं के खाते खुलवाने के निर्देश दिए गए।
कार्यरत महिलाओं के लिए पालना केंद्रों में 15 दिनों में रिक्त पदों पर भर्ती पूर्ण करने का आदेश दिया गया। बाल विवाह रोकथाम को लेकर कलेक्टर ने कहा कि कम उम्र में विवाह से महिलाओं में एनीमिया और बच्चों में कुपोषण की समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने पिछड़े क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज करने और बाल विवाह मुक्त कोरबा बनाने का आह्वान किया।
टीएचआर वितरण सहित सभी योजनाओं की जानकारी निर्धारित पोर्टल पर समय पर अपलोड करने, पोषण ट्रैकर में प्रतिदिन डेटा दर्ज करने और पारदर्शिता बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी बसंत मिंज सहित सभी परियोजना अधिकारी उपस्थित रहे।





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