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शनिवार, जनवरी 24, 2026
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कोयला खदानों में ठेका श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई: छत्तीसगढ़ में जागरूकता अभियान तेज

कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ ठेका कामगार यूनियन ने कोयला खदानों और आउटसोर्सिंग कंपनियों में काम कर रहे ठेका श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के लिए बड़ा अभियान छेड़ दिया है। यूनियन का उद्देश्य है कि सालों से खनन और ओबी हटाने जैसे जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे ठेका श्रमिकों को स्थानीय रोजगार का अधिकार दिलाया जाए। इसी क्रम में गेवरा, दीपका और कुसमुंडा क्षेत्रों में जागरूकता बैठकों का आयोजन किया गया।

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष चौहान ने जानकारी दी कि केंद्रीय श्रम सलाहकार बोर्ड और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सिफारिशों के अनुसार कोल इंडिया लिमिटेड ने 2013 में अपने सभी अधीनस्थ कंपनियों को ठेका श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) अंतर्गत खदानों में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

उन्हेंने आरोप लगाया कि एसईसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनियों की मिलीभगत से श्रमिकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण ठेका श्रमिकों को उनके वाजिब अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
1988 में केंद्र सरकार ने कोयला उत्खनन और ओबी हटाने जैसे कार्यों में ठेका श्रमिकों को प्राथमिकता देने का आदेश पारित किया था। इसके तहत श्रमिकों को एनसीडब्ल्यू (नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट) के अंतर्गत लाने की सिफारिश की गई थी। लेकिन आज तक इस आदेश का पालन नहीं हो पाया है।

संतोष चौहान ने कहा कि कोल इंडिया में स्थानीय श्रमिकों की संख्या तेजी से घट रही है। लगभग सभी कार्य आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के तहत कराए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय मजदूरों को भारी नुकसान हो रहा है।

ठेका कामगार यूनियन ने खदानों में कार्यरत श्रमिकों को संगठित करने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। यूनियन न केवल कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है, बल्कि श्रमिकों के साथ मिलकर सड़क पर आंदोलन तेज करने का भी ऐलान किया है।
यूनियन के अभियान का उद्देश्य केवल कानूनी और श्रम अधिकारों तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा मकसद ठेका श्रमिकों को मानवीय सम्मान और सामाजिक सुरक्षा दिलाना है। परिवारों पर बढ़ते आर्थिक दबाव, बच्चों की शिक्षा और बेहतर जीवनयापन के अधिकार जैसे मुद्दे यूनियन के संघर्ष का मुख्य हिस्सा हैं।

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