कोरबा (पब्लिक फोरम)। बढ़ती महंगाई और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा 5 सितंबर को चीनी सत्याग्रह आयोजित करेगी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर होने वाला यह कार्यक्रम शनिवार शाम 4 बजे सुभाष चौक, निहारिका में होगा। कांग्रेस नेताओं के अनुसार प्रदर्शन का उद्देश्य चीनी, प्याज सहित रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के मुद्दे को उठाना है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा के नेतृत्व में 5 सितंबर 2026, शनिवार को चीनी सत्याग्रह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम शाम 4 बजे सुभाष चौक, निहारिका कोरबा में होगा।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने बताया कि देश और प्रदेश में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के विरोध में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि चीनी और प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ता है।
पूर्व मंत्री और विधायक होंगे शामिल
कांग्रेस के अनुसार कार्यक्रम में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया तथा पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर, मोहित केरकेट्टा और श्यामलाल कंवर विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम में शामिल होकर महंगाई के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की है।
मोर्चा संगठनों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को बुलाया
जिला कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान ने जिला कांग्रेस कमेटी के साथ महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, सेवादल, पार्षद और पूर्व पार्षदों सहित पार्टी के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों से समय पर पहुंचने का आग्रह किया है।
उन्होंने इंटक, एनएसयूआई, ब्लॉक कांग्रेस, मंडल, वार्ड और बूथ कमेटियों के पदाधिकारियों के अलावा कांग्रेस के विभिन्न मोर्चा संगठनों, विभागों और प्रकोष्ठों से जुड़े कार्यकर्ताओं से भी कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की है।
महंगाई का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है। ऐसे में महंगाई का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण विषय रहा है। कांग्रेस का यह कार्यक्रम इसी मुद्दे को स्थानीय स्तर पर उठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कोरबा में होने वाला चीनी सत्याग्रह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती लागत पर सार्वजनिक बहस का एक अवसर भी है। महंगाई का वास्तविक असर तभी स्पष्ट होता है, जब बाजार की कीमतों और आम परिवारों की आय के बीच के अंतर को देखा जाए। यही अंतर यह तय करता है कि बढ़ती कीमतों का बोझ लोगों के घरेलू बजट पर कितना पड़ रहा है।






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