कोरबा (पब्लिक फोरम)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा राहुल गांधी को “देश का नंबर एक आतंकवादी” जैसे आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित करने और महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ शिवसेना शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड द्वारा राहुल की जीभ काटने वाले को 11 लाख रुपये का इनाम देने की धमकी के विरोध में, 18 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटी ने कोरबा के सुभाष चौक निहारिका में दोनों नेताओं का पुतला दहन किया।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिनमें सपना चौहान, श्याम सुंदर सोनी, संतोष राठौर, बी.एन सिंह, गजानंद साहू, मुकेश राठौर, प्रदीप पुरायणे, दुष्यंत शर्मा, राजेन्द्र तिवारी, मनहरण राठौर, अमित सिंह, विकास सिंह सहित कई अन्य प्रमुख नाम शामिल थे। कांग्रेस के नेताओं ने इस घटना के माध्यम से देश में हो रही अमर्यादित बयानबाजी और उसकी अनदेखी पर नाराजगी व्यक्त की।
सपना चौहान ने कहा, “राहुल गांधी न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और उनके खिलाफ इस तरह के आपत्तिजनक बयान दिए जाने पर कोई कानूनी कार्रवाई न होना दुखद और चिंताजनक है। क्या देश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ बची है?”
वहीं, श्याम सुंदर सोनी ने कहा, “राहुल गांधी के लगातार न्याय की मांग और जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने से मोदी सरकार दबाव में है। इसी कारण उनके मंत्री अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि सरकार बैकफुट पर है, और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।”
भारतीय राजनीति में अमर्यादित भाषा और व्यक्तिगत हमले खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके हैं। केंद्रीय मंत्री और विधायकों द्वारा इस तरह के आपत्तिजनक बयान देना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राजनीतिक दलों में आपसी सम्मान और संयम का अभाव हो रहा है।
राहुल गांधी के खिलाफ दिए गए इन बयानों पर अब तक कोई कानूनी कार्रवाई न होने से यह सवाल उठता है कि क्या कानून सभी के लिए समान है या फिर सत्ता के प्रभाव में इसका दुरुपयोग हो रहा है। राजनीतिक नेताओं को अपनी भाषा और आचरण में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए, ताकि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।
कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बताता है कि जनता और विपक्ष अभी भी आपत्तिजनक बयानों के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।





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