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गुरूवार, जनवरी 22, 2026
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SECL दीपका में CISF की तानाशाही: ग्रामीणों पर अत्याचार और करोड़ों की चोरी में संरक्षण का आरोप

कोरबा/दीपका (पब्लिक फोरम)। एसईसीएल दीपका क्षेत्र में तैनात सीआईएसएफ जवानों की कार्यशैली विवादों में घिर गई है। एक तरफ श्रमिक चौक पर आम ग्रामीणों के साथ बदसलूकी और मनमानी की शिकायतें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर खदान के भीतर करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति की चोरी में सुरक्षाबलों की मिलीभगत की आशंका गहरा रही है।

आम रास्ते पर जवानों की मनमानी
श्रमिक चौक, जो रेंकी, सुवाभोड़ी, चैनपुर, हरदीबाजार सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, वहां से गुजरने वाले ग्रामीणों को सीआईएसएफ जवानों द्वारा बेवजह रोका जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जवान आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करते हैं। गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार अब आम बात हो गई है। आवागमन बाधित होने से स्कूली बच्चों, मरीजों और दिहाड़ी मजदूरों को रोज भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

खदान में सुरक्षा का पोल खुला, डीजल और कबाड़ का खेल जारी
चौंकाने वाली बात यह है कि जो जवान आम जनता पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हैं, वही खदान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।

दीपका खदान से बड़े पैमाने पर हो रही चोरी:-
01. डीजल चोरी: मशीनों और टैंकों से लगातार डीजल की चोरी हो रही है।
02. कबाड़ की तस्करी: मशीनी पुर्जे और लोहे की सामग्री खुलेआम खदान से बाहर ले जाई जा रही है।
03. कीमती उपकरणों की चोरी: अन्य महत्वपूर्ण सामग्री और उपकरणों की चोरी भी बदस्तूर जारी है।

क्या जवानों का है मौन समर्थन?
ग्रामीणों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का साफ कहना है कि बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के इतनी बड़ी मात्रा में चोरी असंभव है। यह आशंका गहराती जा रही है कि सीआईएसएफ जवानों के संरक्षण में ही यह पूरा गोरखधंधा फल-फूल रहा है। सुरक्षा के नाम पर तैनात बल अब भ्रष्टाचार और जन-उत्पीड़न का प्रतीक बनता जा रहा है।

जनता की मांग
क्षेत्र की जनता ने एसईसीएल प्रबंधन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:-
01.श्रमिक चौक पर ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले जवानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
02.खदान के भीतर हो रही संगठित चोरी की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
03.आम रास्ते पर आवागमन सुचारू रूप से बहाल किया जाए।

यदि प्रबंधन और प्रशासन जल्द ही इस तानाशाही और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं कसता, तो क्षेत्र के ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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