गुरूवार, फ़रवरी 12, 2026
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मजदूर-किसान एकता का शंखनाद: 12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल; ऐक्टू ने छत्तीसगढ़ में एकजुटता का किया आह्वान

भिलाई (पब्लिक फोरम)। आज का दिन भारतीय श्रम आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। ‘ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस’ (ऐक्टू), छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के समस्त श्रमिक वर्ग और आम नागरिकों से आज, 12 फरवरी को आयोजित ‘अखिल भारतीय आम हड़ताल’ को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने की पुरजोर अपील की है।
यह हड़ताल केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के साझा संकल्प का प्रतिबिंब है। जब खेत और कारखाने एक साथ खड़े होते हैं, तो वह सत्ता के गलियारों में गूँजने वाली सबसे बड़ी आवाज बन जाती है।

हड़ताल की बुनियाद: अधिकारों की रक्षा की लड़ाई
ऐक्टू के राज्य महासचिव बृजेन्द्र तिवारी के अनुसार, यह हड़ताल उन नीतियों के खिलाफ एक सीधा हस्तक्षेप है जिन्हें ‘जनविरोधी’ और ‘मजदूर-विरोधी’ माना जा रहा है। संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मौजूदा श्रम कोड कानून किसी सुधार का हिस्सा नहीं, बल्कि श्रमिकों के लिए ‘गुलामी के दस्तावेज’ के समान हैं।

किन कानूनों पर है विरोध?
इस देशव्यापी आंदोलन के केंद्र में कई विवादित विधेयक और कानून हैं, जिन्हें वापस लेने की मांग की जा रही है:
🔹श्रम कोड कानून: जिसे श्रमिकों के अधिकारों के हनन के रूप में देखा जा रहा है।
🔹वी.बी. ग्राम जी अधिनियम 2025 व शांति अधिनियम 2025: जिन्हें नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए चुनौती माना गया है।
🔹बिजली (संशोधन) विधेयक 2025: जिससे आम आदमी पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
🔹विधेयकों की लंबी सूची: इसमें ‘सबकी सुरक्षा सबका बीमा’, ‘बीज विधेयक’ और ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025’ जैसे कानून शामिल हैं, जिन्हें किसान और छात्र हितों के प्रतिकूल बताया जा रहा है।

संकट में जन सरोकार

यह हड़ताल केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं है। यह ‘लोकतंत्र के सामाजिक अनुबंध’ को बचाने की कोशिश है। जब शिक्षा, बीज, बिजली और सुरक्षा जैसे बुनियादी विषयों पर कानून बनते हैं, तो उनमें उन लोगों की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए जो इससे सीधे प्रभावित होते हैं। ऐक्टू का यह आह्वान इसी संवादहीनता के खिलाफ एक लोकतांत्रिक विद्रोह है।
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक बेल्ट से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, इस हड़ताल का व्यापक असर दिखने की संभावना है। कॉमरेड बृजेन्द्र तिवारी ने दोहराया है कि यह लड़ाई केवल आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और गरिमा को सुरक्षित करने की है।

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