बुधवार, जनवरी 28, 2026
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एचआईवी/एड्स के खिलाफ जागरूकता की मुहिम: कोरबा में रवाना हुआ प्रचार रथ; हर गांव तक पहुंचेगा संदेश

कोरबा (पब्लिक फोरम)। जिले में एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मंगलवार को एक अहम पहल की शुरुआत हुई। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने एड्स जागरूकता रथ और कला जत्था दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ अब जिले के हर विकासखंड के चिन्हांकित गांवों में जाकर लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाव और नियंत्रण की जानकारी देगा।

इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सी.के. सिंह, एड्स नोडल अधिकारी डॉ. बी.आर. रात्रे, जिला टीकाकरण अधिकारी कुमार पुष्पेश, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पद्माकर शिन्दे और कला जत्था के सदस्यों सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

क्या है एचआईवी और क्यों खतरनाक?
डॉ. केशरी ने बताया कि एचआईवी एक ऐसा वायरस है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। यह सीडी-4 कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे शरीर संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में असमर्थ हो जाता है। अगर समय रहते इलाज न मिले तो यह एड्स का रूप ले लेता है। लेकिन सही इलाज से इसे नियंत्रित कर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

पहचान मुश्किल, जांच जरूरी
एचआईवी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके अपने कोई विशेष लक्षण नहीं होते। यह अक्सर दूसरी बीमारियों की आड़ में छिपा रहता है। एक महीने या उससे अधिक समय तक लगातार बुखार, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, रात को पसीना, उल्टी, दस्त, निमोनिया, मुंह में छाले या टीबी जैसे संक्रमण इसके संकेत हो सकते हैं।

डॉ. केशरी ने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार एचआईवी की जांच जरूर करानी चाहिए। यौन रूप से सक्रिय लोगों, असुरक्षित यौन संबंध रखने वालों, सुई साझा करने वालों और यौन संचारित रोग से पीड़ित व्यक्तियों को हर तीन से छह महीने में जांच करानी चाहिए। हर गर्भवती महिला के लिए पहली तिमाही में एचआईवी जांच अनिवार्य है।

2017 का कानून देता है मरीजों को अधिकार
जागरूकता अभियान के तहत लोगों को एचआईवी/एड्स मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए 2017 में बने कानून की भी जानकारी दी जाएगी। साथ ही टोल फ्री नंबर 1097 पर कभी भी, कहीं भी मुफ्त परामर्श और जानकारी ली जा सकती है।

कहां कराएं जांच?
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आग्रह किया कि जिन लोगों में उपरोक्त लक्षण दिखें, वे मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) के आईटीसी सेंटर, सभी विकासखंडों के आईटीसी सेंटर या टोल फ्री नंबर 1097 पर संपर्क कर निःशुल्क जांच करा सकते हैं।
यह अभियान न सिर्फ जागरूकता फैलाएगा, बल्कि समाज में एचआईवी/एड्स से जुड़े भ्रम और भेदभाव को भी दूर करने में मददगार साबित होगा।

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