शनिवार, फ़रवरी 28, 2026
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कटघोरा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का महाआंदोलन: 3 हजार महिलाओं की आक्रोश रैली, सरकार को चेतावनी – मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और तेज

कोरबा (कटघोरा)। जिले के कटघोरा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का आक्रोश दूसरे दिन खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। हजारों की संख्या में महिलाएं एकजुट होकर विशाल रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय पहुंचीं और अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

इस आक्रोश रैली में कटघोरा, पाली और पोंडी उपरोड़ा ब्लॉक की करीब तीन हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शामिल रहीं। दो दिवसीय धरना आंदोलन के पहले दिन कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लगाकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया था, जबकि दूसरे दिन आंदोलन ने उग्र रूप लेते हुए व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप धारण कर लिया।

एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने वर्षों से लंबित मांगों पर तत्काल और ठोस निर्णय लेने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि वे प्रतिदिन आठ घंटे से अधिक समय तक सेवाएं देती हैं, इसके बावजूद उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। न्यूनतम वेतनमान, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वे आज भी वंचित हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 का हवाला देते हुए सरकार से अपने वादे निभाने की मांग की।

कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे केवल मानदेय पर नहीं, बल्कि सम्मानजनक कर्मचारी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा समय-समय पर आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नीति निर्णय नहीं लिया गया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को चरणबद्ध रूप से और व्यापक किया जाएगा। आने वाले दिनों में जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आंदोलन फैलाने की रणनीति बनाई जा रही है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

कटघोरा में निकली यह विशाल आक्रोश रैली केवल मांगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की आवाज़ है जो वर्षों से समाज की नींव मजबूत करने का कार्य कर रही हैं, लेकिन स्वयं असुरक्षा और उपेक्षा के दौर से गुजर रही हैं। अब यह आंदोलन सरकार की संवेदनशीलता और निर्णय क्षमता की वास्तविक परीक्षा बन गया है।

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