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गुरूवार, जनवरी 22, 2026
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वेदांता के खिलाफ 11 सूत्रीय मांगों के साथ बालको में विशाल धरना-आंदोलन का ऐलान

कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में वेदांता कंपनी की गतिविधियों के खिलाफ जनआक्रोश तेज होता दिख रहा है। स्थानीय पर्यावरण और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) को बालको परसाभांठा गेट के सामने एक विशाल धरना-आंदोलन आयोजित करने का ऐलान किया गया है। यह आंदोलन “वेदांता भगाओ, बालको बचाओ” के नारे के साथ 11 सूत्रीय मांगों को लेकर होगा। कार्यक्रम का आयोजन कोरबा पर्यावरण विकास समिति द्वारा किया जा रहा है।

क्या और क्यों?
आयोजकों का कहना है कि वेदांता कंपनी पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे, स्थानीय लोगों की उपेक्षा, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप हैं। इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसी के विरोध में यह धरना-आंदोलन बुलाया गया है।

मुख्य मांगें क्या हैं?
आंदोलन के पोस्टर के अनुसार प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:—
1. सरकारी भूमि पर वेदांता द्वारा किए गए अवैध कब्जे पर रोक।
2. स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार में प्राथमिकता।
3. पेड़ों की अवैध कटाई पर तत्काल रोक।
4. मजदूरों को उचित मजदूरी और बुनियादी सुविधाएं।
5. पर्यावरण प्रदूषण के तय मानकों का सख्ती से पालन।
6. बेलारी बजरंग चौक से सतनाम नगर तक नए पुल का निर्माण।
7. बिजली उत्पादन में भारी परिवहन और ओवरलोडिंग ट्रकों पर रोक।
8. परसाभांठा सड़क पर डिवाइडर का निर्माण।
9. विस्थापित शांतिनगर मोहल्ले के निवासियों को न्याय।
10. रेलवे द्वारा कोयला परिवहन में ओवरलोडिंग पर नियंत्रण (टी.पी. नगर कोरबा और चेकपोस्ट बालको क्षेत्र)।
11. सीआईएसएफ की तैनाती को लेकर पारदर्शी कार्रवाई।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रदूषण और भारी वाहनों की आवाजाही से उनका रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। खेतों की मिट्टी, पानी और हवा पर असर पड़ा है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। रोजगार की उम्मीद में बैठे युवाओं को भी निराशा हाथ लगी है। मजदूर वर्ग को समय पर मजदूरी और सुरक्षित कामकाजी माहौल नहीं मिल पाने की शिकायतें हैं।

आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से धरना-आंदोलन में शामिल होने की अपील की है, ताकि जनदबाव के जरिए समस्याओं का समाधान निकल सके। उनका कहना है कि यदि मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
यह धरना केवल विरोध नहीं, बल्कि कोरबा के लोगों की उस उम्मीद की आवाज है, जिसमें विकास के साथ पर्यावरण, रोजगार और इंसान की गरिमा की रक्षा भी शामिल हो।

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