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रविवार, जनवरी 25, 2026
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शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला परसाभांठा बालको में न्योता भोज का भव्य आयोजन

न्योता भोज ने बिखेरा बच्चों के चेहरों पर खुशियों का रंग: स्कूल में आयोजन ने छुआ दिल!

बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक शाला परसाभांठा में एक खास न्योता भोज का आयोजन हुआ, जिसने बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और दिलों में खुशी भर दी। इंटक के सदस्यों की पहल से हुए इस आयोजन में स्कूल के 83 बच्चों ने हिस्सा लिया। यह दिन न सिर्फ भोजन का उत्सव था, बल्कि प्यार, एकजुटता और शिक्षा के प्रति सम्मान का भी प्रतीक बना।

आयोजन की शुरुआत: माँ सरस्वती को नमन
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भावनात्मक और पवित्र अंदाज में हुई। मुख्य अतिथि जय प्रकाश यादव (महासचिव, बालको इंटक और सचिव, राष्ट्रीय इंटक), प्रधान पाठिका संध्या सिंह और पवित्री खरे ने माँ सरस्वती की आरती की और फूल अर्पित किए। इसके बाद सभी बच्चों को पानी की बोतलें उपहार में दी गईं, जिसे पाकर उनकी आँखों में चमक साफ झलक रही थी। यह छोटा-सा उपहार भी उनके लिए अनमोल साबित हुआ।

बच्चों के साथ बँटी खुशियाँ
न्योता भोज का माहौल तब और खास बन गया, जब शिक्षकों, इंटक सदस्यों और बच्चों ने एक साथ बैठकर भोजन का आनंद लिया। इस आयोजन में शामिल इंटक सदस्यों—विमलेश, देवेंद्र यादव, यशवंत, नितिन चंदेल, देवेंद्र वर्मा, संजय, रोहित, संदीप चंदेल, सुभाष यादव, पी सतीश, अखिलेश दुबे, हितेश साहू, सोनेश घृतलहरे, संतोष सिन्हा और रूपेश उपाध्याय—ने बच्चों के साथ समय बिताया और उनकी खुशियों में शरीक हुए। स्कूल के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी इस पहल को सफल बनाने में पूरा योगदान दिया।

कार्यक्रम का संचालन रघुराज सिंह ने बेहद सहज और प्रभावी तरीके से किया। उनकी आवाज में बच्चों के प्रति स्नेह और आयोजन के प्रति जिम्मेदारी साफ झलक रही थी। यह आयोजन न सिर्फ बच्चों के लिए यादगार रहा, बल्कि हर मौजूद शख्स के दिल को छू गया।

एक आयोजन से ज्यादा, एक संदेश
यह न्योता भोज सिर्फ खाने-पीने का मौका नहीं था, बल्कि समाज में शिक्षा और बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का एक संदेश भी दे गया। इंटक सदस्यों की यह पहल बताती है कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। बच्चों के चेहरों पर खुशी और उनके मन में सम्मान का भाव देखकर हर कोई अभिभूत था।

परसाभांठा जैसे छोटे से श्रमिक बस्ती में हुए इस आयोजन ने साबित कर दिया कि मानवता और संवेदनशीलता आज भी जिंदा है। यहाँ मौजूद हर शख्स ने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम उठाया। यह आयोजन न सिर्फ एक दिन की खुशी लेकर आया, बल्कि आने वाले दिनों के लिए भी एक प्रेरणा बन गया।

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