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कोरबा में 21 नवंबर को विशेष लोक अदालत: चेक बाउंस मामलों का होगा निपटारा

कोरबा (पब्लिक फोरम)। चेक बाउंस से संबंधित मामलों में अदालतों के चक्कर काट रहे पक्षकारों को विवाद सुलझाने का एक अवसर मिलने जा रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशों और सर्वोच्च न्यायालय की विशेष पहल के तहत 21 नवंबर को विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी।
इसमें परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस धारा के अंतर्गत निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने पर चेक अनादरण के मामलों में कार्रवाई की जाती है।

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विशेष लोक अदालत का उद्देश्य ऐसे मामलों को आपसी सहमति से सुलझाना, पक्षकारों का समय और खर्च बचाना तथा न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करना है।

न्यायिक अधिकारियों को दिए गए आवश्यक निर्देश
विशेष लोक अदालत के आयोजन और मामलों के निपटारे की तैयारियों को लेकर 15 अक्टूबर 2026 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोरबा नीता यादव की अध्यक्षता में न्यायिक अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयुरा गुप्ता सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा की सचिव डिम्पल उपस्थित रहीं।

बैठक में नीता यादव ने कहा कि चेक बाउंस से संबंधित मामलों का समाधान आपसी समझौते के माध्यम से संभव है। विशेष लोक अदालत पक्षकारों को सरल और सुलभ तरीके से अपने विवादों का निपटारा करने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों में लंबित ऐसे मामलों की पहचान करने और समय पर आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही, जहां जरूरत हो, वहां पक्षकारों के बीच पूर्व परामर्श और समझौता वार्ता आयोजित करने पर जोर दिया, ताकि विवादों का समाधान आपसी सहमति से किया जा सके।

पक्षकारों को भेजे जाएंगे नोटिस, समझौते की प्रक्रिया पर जोर
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयुरा गुप्ता ने बताया कि न्यायालयों में लंबित मामलों के आधार पर संबंधित पक्षकारों को नोटिस भेजने सहित अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डिम्पल के अनुसार, विशेष लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए बैंकों, वित्तीय कंपनियों के अधिकारियों और अधिवक्ताओं के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक चेक बाउंस मामलों के निपटारे की संभावनाएं तलाशना है।

तैयारियों के तहत लंबित मामलों की पहचान करने के साथ ही संबंधित पक्षकारों तक समय पर सूचना पहुंचाने और उन्हें समझौते के विकल्प से अवगत कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।

प्री-सिटिंग के माध्यम से भी मिल सकता है समाधान का अवसर
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीता यादव ने संबंधित न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोक अदालत की सफलता के लिए पक्षकारों को समय पर सूचना दी जाए और उन्हें आपसी समझौते की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
उन्होंने आम नागरिकों और संबंधित पक्षकारों से अपील की कि यदि उनका कोई मामला परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत न्यायालय में लंबित है, तो वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा या संबंधित न्यायालय से संपर्क कर सकते हैं।

पक्षकार विशेष लोक अदालत से पहले आयोजित होने वाली प्री-सिटिंग यानी पूर्व बैठक में शामिल होकर भी समझौते की संभावनाओं पर चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा, 21 नवंबर को आयोजित विशेष लोक अदालत में भाग लेकर आपसी सहमति से मामले के निपटारे की पहल कर सकते हैं।
हालांकि, समझौते के माध्यम से निपटारा तभी संभव होगा, जब संबंधित पक्षकार सहमत हों और मामला लागू कानूनी प्रावधानों के तहत समझौते योग्य हो।

बैठक में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयुरा गुप्ता, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सत्यानंद प्रसाद, सोनी तिवारी, डॉली ध्रुव, तृप्ति राघव और ग्रेसी सिंह उपस्थित रहीं। इसके अलावा व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी प्रिया और तृप्ति अग्रवाल तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डिम्पल भी बैठक में शामिल हुईं।

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