कोरबा (पब्लिक फोरम)। विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य भी उनके बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से 14 अक्टूबर 2026 को सरस्वती शिशु मंदिर, एचटीपीपी दर्री में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने, अपनी भावनाओं को समझने और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन लेने के महत्व की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के अवसर पर 14 अक्टूबर को किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एस.एन. केशरी, नोडल अधिकारी डॉ. अशोक शाक्य और जिला कार्यक्रम प्रबंधक पद्माकर शिंदे के निर्देशन में संपन्न हुआ। इस दौरान ताराचंद श्रीवास और तृप्ति ब्रह्माणी ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जीवन का एक आवश्यक हिस्सा है। सकारात्मक सोच, अपनी भावनाओं को समझना और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के प्रति सजगता व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन लेने में न करें संकोच
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति सजग रहने और आवश्यकता पड़ने पर उचित मार्गदर्शन लेने के लिए प्रेरित किया गया। मानसिक परेशानी होने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय अपनी समस्या को समझना और मदद लेना महत्वपूर्ण है।
किशोरावस्था में पढ़ाई, परीक्षाओं, भविष्य और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विद्यार्थियों को अपनी परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकती है।
विद्यालयों में इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे मानसिक परेशानी को कमजोरी समझने जैसी धारणाओं को दूर करने और जरूरत के समय सहायता लेने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिल सकती है।
प्राचार्य ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सुषमा बारस्कर ने अतिथियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यार्थियों को नियमित रूप से ऐसा वातावरण मिलना जरूरी है, जहां वे अपनी समस्याओं और भावनाओं को बिना झिझक साझा कर सकें। विद्यालय, परिवार और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।








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