कोरबा (पब्लिक फोरम)। कोरबा के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित नगर पालिक निगम द्वारा निर्मित शुभदा कॉम्प्लेक्स की जर्जर हालत ने स्थानीय व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। भवन की छत से पानी के रिसाव और मुख्य कॉलमों से बाहर झांकते लोहे के सरियों के बीच व्यापारी रोजाना जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर इस गंभीर खतरे से अवगत कराया है, लेकिन बार-बार गुहार के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला और कब उठा मुद्दा
कोरबा के व्यस्त परिवहन नगर क्षेत्र में स्थित शुभदा कॉम्प्लेक्स लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। यहां कारोबार करने वाले दुकानदारों ने गत 27 सितंबर 2026 को लिखित शिकायत देकर भवन की बदहाल स्थिति और लंबित रखरखाव की समस्याओं से निगम प्रशासन को अवगत कराया था। दुकानदारों का आरोप है कि शुरुआती निरीक्षण के बाद से अधिकारी इस गंभीर मामले पर खामोश बैठे हैं, जिससे स्थिति दिन-प्रतिदिन और अधिक खतरनाक होती जा रही है।
जर्जर होती इमारत और बुनियादी सुविधाओं का अकाल
निगम द्वारा बनाए गए इस व्यावसायिक परिसर की हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि इसकी छत से लगातार पानी टपकता रहता है। बारिश या सीलन के कारण मुख्य कॉलमों का कंक्रीट उखड़ने लगा है और लोहे के सरिए साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं। संरचनात्मक कमजोरी के अलावा इस कॉम्प्लेक्स में स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी भारी अभाव है। इससे न सिर्फ रोजाना कारोबार करने वाले दुकानदारों को परेशानी होती है, बल्कि यहां आने वाले ग्राहकों को भी भारी असुविधा उठानी पड़ती है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स का रुख और प्रशासनिक उदासीनता
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। चैंबर ने अधिकारियों से मांग की है कि इसे महज सामान्य मरम्मत का मामला मानकर नजरअंदाज न किया जाए। संगठन ने तकनीकी विशेषज्ञों से तत्काल भवन की लोड-बेयरिंग क्षमता और सुरक्षा का परीक्षण कराने तथा युद्ध स्तर पर जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराने का आग्रह किया है। चैंबर की कार्यकारिणी स्वयं मौके पर जाकर हालात का जायजा लेने की तैयारी में है ताकि नगर निगम पर प्रभावी दबाव बनाया जा सके।
संभावित प्रभाव और संकट
यदि समय रहते इस व्यावसायिक परिसर की तकनीकी जांच और मरम्मत नहीं कराई गई, तो कोई भी बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। एक तरफ जहां जान-माल के नुकसान की आशंका मंडरा रही है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों की आजीविका भी खतरे में है। असुरक्षित माहौल के कारण ग्राहकों ने भी इस परिसर से दूरी बनाना शुरू कर दिया है, जिससे कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है।
शुभदा कॉम्प्लेक्स की यह बदहाली केवल एक इमारत के जर्जर होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह नगरीय प्रशासन की संवेदनहीनता और लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार किया जाएगा या फिर प्रशासन नींद से जागकर समय रहते इन व्यापारियों को एक सुरक्षित और सुविधायुक्त कार्यस्थल मुहैया कराएगा?







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