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कोरबा में हाथियों का उत्पात: आंगनबाड़ी तोड़ खाया नौनिहालों का राशन

कोरबा (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के कोरबा वनमंडल के कुदमुरा वन परिक्षेत्र में शुक्रवार की रात 10 से 12 हाथियों के एक दल ने धोबनीमार गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर हमला कर दिया। भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचे इस झुंड ने केंद्र की खिड़की तोड़कर भीतर रखा बच्चों का अनाज और रेडी-टू-ईट (Ready-to-Eat – तैयार पोषण आहार) चट कर दिया। इस अचानक हुए हमले से गांव के 27 मासूम बच्चों की नियमित शिक्षा और दैनिक पोषण व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

रात के अंधेरे में तांडव और तबाही
यह घटना उरगा-हाटी राजमार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत तौलीपाली के आश्रित ग्राम धोबनीमार की है। शुक्रवार की शाम रोजाना की तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गेंदबाई और सहायिका दीपा राठिया बच्चों की छुट्टी के बाद केंद्र को ताला लगाकर अपने घरों को लौट गई थीं। देर रात घने जंगलों से निकलकर हाथियों का दल गांव की सीमा में दाखिल हुआ और सीधे आंगनबाड़ी भवन को अपना निशाना बनाया।
हाथियों ने भोजन की महक पाकर केंद्र की पिछली खिड़की को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इसके बाद सूंड के सहारे अंदर रखा चावल, अन्य खाद्यान्न सामग्री और बच्चों के लिए सुरक्षित रखा गया ‘रेडी-टू-ईट’ पोषण आहार खा गए। राशन समेटने के चक्कर में हाथियों ने केंद्र के भीतर रखे टीन के संदूक, जरूरी फाइलों और अन्य शिक्षण सामग्रियों को भी पैरों तले कुचलकर क्षतिग्रस्त कर दिया।

सुबह का मंजर और ग्रामीणों में दहशत
शनिवार सुबह जब स्थानीय ग्रामीण केंद्र के पास से गुजरे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। चारों तरफ बिखरा हुआ सामान, टूटी खिड़की और जमीन पर फैले हुए चावल के दाने गवाही दे रहे थे कि रात में यहां वन्यजीवों ने कितना भारी उत्पात मचाया है।
घटना के बाद ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। प्रभावित बच्चों के परिवारों में अब अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरा डर बैठ गया है। एक स्थानीय ग्रामीण ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
“यह आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ एक सरकारी इमारत नहीं है, बल्कि हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी सेहत की बुनियाद है। हाथियों का डर इस कदर बढ़ गया है कि अब हमें बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी खौफ महसूस हो रहा है।”

आंकड़ों के झरोखे से: प्रभावितों की स्थिति
इस घटना ने सीधे तौर पर गांव के उन सबसे कमजोर और आश्रित नौनिहालों को प्रभावित किया है, जिन्हें इस केंद्र से पोषण मिलता था:
🔹 कुल पंजीकृत बच्चे: 27 नौनिहाल
🔹 प्रारंभिक शिक्षा वर्ग (3 से 6 वर्ष): 15 बच्चे (जिनकी पढ़ाई पूरी तरह बाधित हुई है)
🔹 पोषण आहार वर्ग (6 माह से 3 वर्ष): 12 बच्चे (जिनका सुरक्षित राशन हाथियों ने नष्ट कर दिया)

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था
घटना की भनक लगते ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बिना समय गंवाए सेक्टर सुपरवाइजर हरा राठौर को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराया। इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्च अधिकारियों तक मामले की रिपोर्ट भेजी गई।
प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि संकट की इस घड़ी में भी बच्चों की पढ़ाई और पोषण आहार का वितरण रुकना नहीं चाहिए। इसके तहत, विभाग ने गांव में ही एक किराए के मकान में अस्थायी रूप से आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन शुरू करने का फैसला लिया है, ताकि बच्चों को नियमित सेवाएं मिलती रहें।

क्यों बढ़ रहा है मानव-हाथी संघर्ष?
कोरबा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही कोई नई घटना नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर और पुराने पारिस्थितिक असंतुलन की ओर इशारा करती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों के लगातार कटने, प्राकृतिक आवासों में इंसानी दखल बढ़ने और वनों के भीतर भोजन व पानी की भारी कमी के कारण हाथी अब भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं। हालांकि वन विभाग लगातार निगरानी का दावा करता है, लेकिन मैदानी स्तर पर ये उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। सार्वजनिक भवनों, स्कूलों और खेतों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

यह घटना केवल एक सरकारी भवन के क्षतिग्रस्त होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासियों और श्रमिकों के जीवन की असुरक्षा को उजागर करती है। प्रशासन को केवल ‘किराए के कमरों’ जैसी तात्कालिक व्यवस्थाओं से आगे बढ़कर, इन संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा दीवारें बनाने और मानव-हाथी द्वंद्व को रोकने के लिए एक स्थायी, दीर्घकालिक ठोस नीति पर काम करना होगा, ताकि किसी मासूम का भविष्य और निवाला सुरक्षित रह सके।

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