होमआसपास-प्रदेशतमनार में गोंड समाज की चिंतन बैठक: विधायक विद्यावती सिदार ने की...

तमनार में गोंड समाज की चिंतन बैठक: विधायक विद्यावती सिदार ने की अध्यक्षता – नहीं बन पाई चुनाव पर सहमति

रायगढ (पब्लिक फोरम)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में गोंड समाज के शीर्ष नेतृत्व और प्रबुद्ध जनों की एक महत्वपूर्ण चिंतन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रायगढ़ में निर्माणाधीन गोंडवाना सामाजिक भवन के भूमि स्वामित्व विवाद को सुलझाना और नई जिला कार्यकारिणी का गठन करना था। हालांकि, संगठन के नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद सभा की अध्यक्षता कर रही लैलूंगा विधायक श्रीमती विद्यावती कुंजबिहारी सिदार ने बैठक को अगली सूचना तक स्थगित करने का निर्णय लिया।

तमनार में जुटे समाज के दिग्गज, भवन निर्माण पर गहराया संकट
यह महत्वपूर्ण बैठक रायगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर दूर घरघोड़ा मार्ग पर स्थित गोंडवाना बाहुल्य ग्राम तमनार में संपन्न हुई। यह क्षेत्र औद्योगिक रूप से भी संवेदनशील है, जहाँ जिंदल ग्रुप का मेगा पावर प्लांट स्थापित है। बैठक की पृष्ठभूमि राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी मजबूत रही, क्योंकि पास ही स्थित गोंडवाना ग्राम कुंजेमुड़ा से पूर्व विधायक स्वर्गीय प्रेम सिंह सिदार (मंडावी) का गहरा नाता रहा है और वर्तमान में उनकी बहू श्रीमती विद्यावती सिदार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा रायगढ़ शहर में बन रहे गोंडवाना सामाजिक भवन के अधूरे निर्माण कार्य का रहा। दरअसल, जिस भूमि पर इस भवन का निर्माण किया जा रहा है, वहाँ अचानक स्वामित्व को लेकर कानूनी या प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हो गया है। इसके चलते निर्माण कार्य अधर में लटक गया है।

कार्यकाल समाप्त होने से जवाबदेही तय करने में आ रही परेशानी
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जिला कार्यकारिणी का निर्धारित कार्यकाल पूरा हो चुका है। निवर्तमान हो चुके संगठन के पास नई नीतियां लागू करने का पूर्ण प्रशासनिक अधिकार नहीं है, जिसके कारण अधूरे निर्माण कार्य के प्रति किसी की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। इसी प्रशासनिक और सामाजिक शून्यता को दूर करने के लिए तमनार में इस चिंतन बैठक की रूपरेखा तैयार की गई थी।

30 गुंड़ियों के प्रतिनिधि पहुंचे, चुनाव पद्धति पर फंसा पेंच
संगठन के निवर्तमान अध्यक्ष श्री रतनसिंह पोरते ने बताया कि बैठक में लैलूंगा, मुकदेगा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, खरसिया, रायगढ़ और पुसौर क्षेत्रों से लगभग 30 ‘गुंड़ी’ के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उल्लेखनीय है कि ‘गुंड़ी’ गोंड समाज की एक पारंपरिक सांगठनिक इकाई है, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों में चक, मुड़ा, सोसाइटी, उपकेन्द्र या पंचगवां-अठगवां भी कहा जाता है।
बैठक का मुख्य एजेंडा नए जिला अध्यक्ष का चुनाव करना था। लेकिन चुनावी प्रक्रिया के स्वरूप को लेकर राय बंटी नजर आई। सभा में इस बात पर तीखी बहस और मंथन हुआ कि:
🔹 क्या हर गुंड़ी से दो-दो प्रतिनिधि लेकर एक औपचारिक निर्वाचन मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) बनाया जाए?
🔹 क्या बैठक में उपस्थित सभी सगाजन (समाज के लोग) सीधे मतदान करें?
🔹या फिर अध्यक्ष चुनने का पूरा फैसला मंच पर आसीन वरिष्ठ पदाधिकारियों के विवेक पर छोड़ दिया जाए?
इन तीनों प्रणालियों पर लंबे विचार-विमर्श के बाद भी समाज के अलग-अलग धड़े किसी एक निर्णय पर एकमत नहीं हो सके।

अगली सूचना तक सभा स्थगित, वरिष्ठ नेताओं की रही मौजूदगी
वैचारिक मतभेद और आम सहमति के अभाव को देखते हुए लैलूंगा विधायक श्रीमती विद्यावती कुंजबिहारी सिदार (मंडावी) ने विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए सभा को अगली सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया। लोकतांत्रिक गरिमा बनाए रखने के लिए यह तय किया गया कि जब तक आगामी बैठक में नया नेतृत्व नहीं चुन लिया जाता, तब तक निवर्तमान अध्यक्ष श्री रतनसिंह पोरते ही कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे।

इस बैठक में समाज के कई प्रभावी चेहरों ने शिरकत की। इनमें यशवंत राज सिंह, राजा तारापुर, बरन सिंह ठाकुर (जगत) पनझर, मेलहान सिंह सिदार पनझर, तारकेश्वर सिंह दीवान (जगत) कछार, ननकीराम सिदार (पोरते) संपिया, दयाराम धुर्वे रायगढ़, मोतीराम सिदार तारापुर, और संरक्षक बनमाली सिंह नेटी शामिल थे।
साथ ही जिला सचिव भुवनेश्वर सिदार, जिला उपाध्यक्ष हिरदे राम दाऊ (नेटी), कार्यकारी जिला अध्यक्ष भूपदेव सिदार (पोर्ते), बाबूलाल सिदार गारे, युवा प्रभाग के जिला उपाध्यक्ष दीपक सिदार (नेताम), मनमोहन सिंह नेताम लैलूंगा, जिला महासचिव (पुसौर) यदुलाल नेताम और महिला प्रभाग की अध्यक्ष स्नेहलता सिदार (नेटी) भी उपस्थित रहीं। बिलासपुर से छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में रमेशचंद्र श्याम भी इस महत्वपूर्ण विमर्श का हिस्सा बने।

तमनार की यह चिंतन बैठक भले ही किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचे बिना समाप्त हो गई हो, लेकिन इसने सामाजिक संगठनों के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और आपसी समन्वय की आवश्यकता को पुरजोर तरीके से सामने रखा है। गोंड समाज जैसे बड़े और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समुदाय के लिए अपने सामाजिक भवन के स्वामित्व विवाद को सुलझाना और एक सर्वसम्मत, मजबूत नेतृत्व की स्थापना करना बेहद जरूरी है। कार्यवाहक नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती समाज के सभी धड़ों को एक मंच पर लाकर आंतरिक मतभेदों को दूर करने की होगी, ताकि सामाजिक विकास के कार्य प्रभावित न हों।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments