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किसान-मजदूर एकजुट: रायपुर में गैस-डीजल महंगाई, खाद किल्लत और श्रम संहिता के खिलाफ फूटा गुस्सा, PM को सौंपा ज्ञापन

किसान-मजदूर एकजुट: रायपुर में गैस-डीजल महंगाई, खाद किल्लत और श्रम संहिता के खिलाफ फूटा गुस्सा, PM को सौंपा ज्ञापन

रायपुर (पब्लिक फोरम)। महंगाई की मार झेल रहे किसानों और मजदूरों का गुस्सा मंगलवार को रायपुर के ग्राम बंगोली स्थित मूरा मोड़ पर सड़क पर उतर आया। छत्तीसगढ़ किसान महासभा और ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रतिवाद धरना-प्रदर्शन में किसान, मजदूर और युवा एक मंच पर आए और केंद्र व राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी।

इस प्रदर्शन में बलौदाबाजार जिले के स्वतंत्र किसान कल्याण संघ के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत कर एकजुटता का संदेश दिया। धरने के अंत में खरोरा तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

## महंगाई वापस लो – किसान को हक दो
ज्ञापन में रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की बेलगाम कीमतें तत्काल वापस लेने की मांग की गई। साथ ही मांग की गई कि किसानों को सही समय पर खाद, बीज, कीटनाशक तथा सस्ता डीजल और रसोई गैस उपलब्ध कराई जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उर्वरक की कृत्रिम कमी और लगातार बढ़ती कीमतें खेती को घाटे का सौदा बना रही हैं।

समस्त कृषि फसलों और दूध के लिए C2+50 प्रतिशत की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और किसानों को पूर्ण कर्जमुक्ति की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाई गई।

## चार श्रम संहिता और वीबी ग्राम जी कानून – रद्द करो!

धरने में मजदूर हितों पर सबसे तीखा प्रहार हुआ। वक्ताओं ने कहा कि कॉर्पोरेटपरस्त चार श्रम संहिताएं मजदूरों के संगठित होने के अधिकार को कुचलती हैं और उन्हें पूंजीपतियों का बंधुआ बनाती हैं। इन्हें तत्काल रद्द कर 29 पुराने श्रम कानून बहाल किए जाएं। इसी के साथ मनरेगा को पुनः पूरी ताकत से लागू करने और वीबी ग्राम जी कानून को निरस्त करने की मांग भी जोरदार तरीके से रखी गई।

## पेपर लीक पर छात्रों का दर्द, ग्राम सभा की अनदेखी पर आक्रोश
धरने में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए। पहले प्रस्ताव में प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक की कड़ी निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह षड्यंत्र युवाओं के भविष्य को नष्ट करने का सुनियोजित प्रयास है, जो उन्हें उच्च शिक्षा और रोजगार से वंचित कर रहा है।

दूसरे प्रस्ताव में अल्दा, भिलौनी सहित दर्जनों गांवों में उद्योग स्थापना के नाम पर ग्राम सभा की संवैधानिक उपेक्षा और किसानों को अंधेरे में रखकर उनकी जमीन की गैरकानूनी खरीद-फरोख्त की तीव्र भर्त्सना की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट प्रशासन और नेताओं के खुले संरक्षण में पहले जमीन छल से खरीदी जाती है, फिर अधिग्रहण कर उद्योगपतियों को सौंप दी जाती है — और विरोध करने वाले ग्रामीणों पर दमन ढाया जाता है।

## मुखर आवाजें, एकजुट संघर्ष

धरने को नरोत्तम शर्मा, बिसहत कुर्रे, धनेश वर्मा, अल्दा से आए उद्योग पीड़ित युवा किसान रमेश कुमार वर्मा, कुथरौद के भोलाराम यादव और भिलौनी के ढालसिंग बंजारे ने संबोधित किया। धरने में दाऊलाल वर्मा, पुष्कर नायक, मेहतरू वर्मा, अनूप वर्मा, परस साहू, विनोद वर्मा, राकेश वर्मा, ईश्वरी लहरी, गोपाल निर्मलकर, प्रेम कोशले और कृष्ण कुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और युवा उपस्थित रहे।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

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