कांकेर (पब्लिक फोरम)। जो पहले से भूखा है, उसी से देश बचाने की कुर्बानी मांगी जा रही है – यह आरोप है राजमिस्त्री मजदूर रेजा कुली एकता यूनियन के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष सुख रंजन नंदी का। उन्होंने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि सरकार भूखी-नंगी जनता को निचोड़ने में लगी हुई है।
एक हफ्ते में चार बार महंगाई की मार
श्री नंदी ने कहा कि देश के मजदूरों की आर्थिक स्थिति पहले से ही डांवाडोल है। ऐसे में मोदी सरकार ने मात्र एक सप्ताह के भीतर चार बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर गरीब मजदूरों की कमर तोड़ दी है।
उन्होंने सवाल उठाया – “गरीब मजदूर शायद अपनी मोटरसाइकिल में थोड़ा कम पेट्रोल भरवा ले, लेकिन क्या वह महंगाई के इस बोझ तले आधे पेट खाकर जिंदगी गुजारेगा?”

अंतरराष्ट्रीय बाजार का बहाना – जनता की आंखों में धूल
मजदूर नेता ने ईरान-अमेरिका तनाव का हवाला देकर कीमतें बढ़ाने को “जनता के साथ धोखा” बताया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 से कोविड काल तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत मात्र “20 से 40 डॉलर प्रति बैरल (159 लीटर)” थी। उस समय जब दुनिया में तेल सस्ता था, तब मोदी सरकार ने उसका फायदा जनता को देने के बजाय “भारी शुल्क लगाकर” 9 वर्षों (2014–2023) में गरीब जनता से 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक राजस्व वसूल किया और पेट्रोलियम कंपनियों को मुनाफा पहुंचाया।
## रुपए में तेल खरीदने के समझौते रद्द – ट्रंप के दबाव में झुकी सरकार
श्री नंदी ने बताया कि भारत दुनिया में कच्चे तेल का “तीसरा सबसे बड़ा आयातक” देश है और अपनी जरूरत का “88 से 90 प्रतिशत” तेल बाहर से मंगाता है। वर्ष 2012 में हुए समझौते के तहत ईरान से कुल तेल आयात का “45 प्रतिशत भुगतान भारतीय रुपए में” होता था। इसी तरह रूस, चीन और सऊदी अरब से भी रुपए में तेल खरीदने का विकल्प था। लेकिन “ट्रंप के दबाव में आकर” वर्तमान केंद्र सरकार ने ये सभी समझौते रद्द कर दिए – जिससे विदेशी मुद्रा का बोझ और बढ़ गया।
महंगाई की दोहरी मार – वेतन स्थिर, खर्च बेलगाम
मजदूर नेता ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ते ही जरूरी वस्तुओं के दाम भी आसमान छूने लगते हैं। इस महंगाई की सबसे क्रूर मार गरीब मजदूर पर पड़ती है। एक तरफ सरकार वेतन बढ़ाने को तैयार नहीं, मामूली मजदूरी पर काम करवाया जा रहा है – और दूसरी तरफ महंगाई के कारण वास्तविक आय लगातार घट रही है। नतीजा यह है कि मजदूर कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है।
यूनियन नेता सुख रंजन नंदी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की कि गरीब जनता को राहत देने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए भारी शुल्क को तत्काल कम किया जाए – ताकि देश का मजदूर, जो इस देश की रीढ़ है, सम्मान से जी सके।





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