कोरबा (पब्लिक फोरम)। जिले में एक वर्ष तक प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रशिक्षु आईएएस क्षितिज गुरभेले को भावपूर्ण माहौल में विदाई दी गई। यह अवसर न केवल उनके लिए बल्कि पूरे जिला प्रशासन के लिए भी भावनात्मक रहा, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके कार्यकाल को याद करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
विदाई समारोह में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि श्री गुरभेले ने अपने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के साथ काम करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को गहराई से समझा है। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर कार्य करने से जो अनुभव मिलता है, वही भविष्य में एक सक्षम अधिकारी बनने की नींव तैयार करता है। कोरबा जैसे जिले में काम करना उनके लिए सीखने का महत्वपूर्ण अवसर रहा, जो उनके आने वाले प्रशासनिक जीवन में बेहद सहायक साबित होगा। इस दौरान कलेक्टर ने उन्हें सिविल सेवा दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।
अपने अनुभव साझा करते हुए क्षितिज गुरभेले ने कहा कि यह एक वर्ष उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सीख से भरपूर समय रहा। उन्होंने बताया कि आईएएस बनने से पहले उनकी सोच एक सामान्य नागरिक की तरह थी, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के बाद उनकी दृष्टि में व्यापक बदलाव आया है। अब वे नीतियों और निर्णयों को अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समझते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पद के साथ केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं, जिन्हें पूरी ईमानदारी से निभाना जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि राजस्व सहित विभिन्न विभागों में काम करने और बैठकों में भाग लेने से उन्हें प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका मिला। उनके अनुसार प्रशिक्षण केवल एक निश्चित समय तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो आगे भी जारी रहती है। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से मिले मार्गदर्शन को अपने भविष्य के लिए अमूल्य बताया।
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग और एसडीएम कटघोरा तन्मय खन्ना ने भी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अपर कलेक्टर ओंकार यादव ने उनकी कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें एक गंभीर, शांत और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी बताया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने क्षितिज गुरभेले को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल और उज्ज्वल प्रशासनिक करियर की कामना की। यह विदाई न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम था, बल्कि एक ऐसे अधिकारी के प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक भी था, जिसने अपने प्रशिक्षण काल में अपनी छाप छोड़ी।





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