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वेदांता के खिलाफ संघर्षरत बालको के पूर्व प्रबंधक रामजी विश्वकर्मा का निधन; शोक में डूबा श्रमिक समाज

बालकोनगर (पब्लिक फोरम)। बालको क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। बालको के पूर्व प्रबंधक, प्रखर वक्ता और श्रमिक समाज व जन-अधिकारों के लिए संघर्षरत जुझारू साथी श्री रामजी विश्वकर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर से बालको परिवार सहित पूरे श्रमिक समाज में गहरा शोक व्याप्त है।

श्री विश्वकर्मा न केवल एक पूर्व अधिकारी थे, बल्कि वे अन्याय और शोषण के विरुद्ध मुखर आवाज़ के रूप में पहचाने जाते थे। बालको में Vedanta प्रबंधन के द्वारा की गई अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ वे लंबे समय से न्यायालय में संघर्षरत थे। कल भी श्रम न्यायालय कोरबा में उनकी सुनवाई थी। यह लड़ाई केवल उनके व्यक्तिगत न्याय की नहीं, बल्कि श्रमिक सम्मान और अधिकारों की भी लड़ाई बन चुकी थी।

उनका अंतिम संस्कार आज उनके गृह ग्राम कलंगपुर,  गुंडरदेही (जिला दुर्ग) में संपन्न हुआ। इस अवसर पर परिवारजनों, स्नेही स्वजनों, ग्रामीणों तथा बड़ी संख्या में बालको कर्मचारियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार और संघर्ष की पहचान बन चुके थे।

वे अपने पीछे अपनी पत्नी, जो स्वयं एक संवेदनशील कवयित्री हैं, और पूरे परिवार को शोकाकुल अवस्था में छोड़ गए हैं। उनके जाने से न केवल एक परिवार, बल्कि एक विचारधारा और संघर्षशील आवाज़ का बड़ा नुकसान हुआ है।

श्री रामजी विश्वकर्मा का जीवन अन्याय के खिलाफ सतत संघर्ष का प्रतीक रहा। उनके प्रेरक उद्बोधन, श्रमिकों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और शोषण के खिलाफ उनका अडिग रुख आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

पब्लिक फोरम सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा, बल्कि यह आगे भी न्याय और अधिकारों की लड़ाई को मजबूती देगा।
उनकी स्मृति अब एक विचार बनकर जीवित रहेगी- संघर्ष, साहस और न्याय की अडिग मिसाल के रूप में।

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