नफरत की राजनीति और खतरे में लोकतंत्र
रायपुर (पब्लिक फोरम)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मिली जान से मारने की धमकी ने राजनीतिक गलियारों में एक गंभीर चिंता को जन्म दे दिया है। इस हिंसक बयानबाजी को भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला करार देते हुए, छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव रूबी तिवारी ने कड़ी निंदा की है और प्रशासन से आरोपी की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है।
राजनीतिक मतभेद बनाम हिंसक मानसिकता
लोकतंत्र की नींव ही वैचारिक स्वतंत्रता और स्वस्थ संवाद पर टिकी है। राजनीति में मतभेद होना एक स्वाभाविक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, लेकिन जब यह असहमति नफरत और हिंसा की भाषा में बदल जाए, तो यह समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन जाती है। रूबी तिवारी ने इसी चिंता को स्वर देते हुए स्पष्ट किया कि सरेआम देश के एक शीर्ष नेता को गोली मारने या जान से खत्म करने की धमकी देना कोई साधारण अपराध नहीं है। यह देश में सुनियोजित तरीके से फैलाई जा रही ‘नफरत की राजनीति’ का एक बेहद खतरनाक और शर्मनाक परिणाम है।
असामाजिक तत्वों के बढ़ते हौसले
युवा कांग्रेस नेत्री ने आगाह किया है कि इस तरह के नफरती बयान समाज में अस्थिरता और खौफ का बीज बोते हैं। यदि समय रहते ऐसे भड़काऊ और आपराधिक तत्वों पर कठोर कानूनी प्रहार नहीं किया गया, तो इनके हौसले और बुलंद होंगे, जो देश की आंतरिक शांति के लिए एक बड़ा संकट साबित हो सकता है।
युवा कांग्रेस की प्रमुख मांगें:-
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस ने शासन-प्रशासन के सामने निम्नलिखित स्पष्ट मांगें रखी हैं:-
🔸 तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी: धमकी देने वाले दोषी व्यक्ति के खिलाफ बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज कर उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
🔸सुरक्षा सुनिश्चित हो: राहुल गांधी सहित सभी जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर उसे और अधिक चाक-चौबंद किया जाए।
🔸 सख्त कानूनी कार्रवाई: सरकार यह सुनिश्चित करे कि लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती देने वाले ऐसे तत्वों को सख्त से सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में एक नजीर पेश हो सके।
लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प
अपने बयान के अंत में रूबी तिवारी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस किसी भी प्रकार की राजनीतिक हिंसा या धमकी के आगे झुकने वाली नहीं है। यह घटना केवल एक व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं है, बल्कि यह देश के कानून और व्यवस्था के लिए एक खुली चुनौती है। अब यह देखना है कि प्रशासन कितनी तत्परता से इन दोषियों पर नकेल कसकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा करता है।





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