नई दिल्ली (पब्लिक फोरम)। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में योगी सरकार के प्रशासन ने भाकपा(माले) के दो वरिष्ठ नेताओं को विवादास्पद परिस्थितियों में गिरफ्तार कर लिया है। पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव एवं केन्द्रीय कमेटी सदस्य कामरेड सुधाकर यादव और राज्य कमेटी सदस्या कामरेड जीरा भारती को शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे चुनार के अदलहाट थाना क्षेत्र से हिरासत में लिया गया।
बिना वारंट हुई गिरफ्तारी
भाकपा(माले) की केन्द्रीय कमेटी ने इस गिरफ्तारी को तानाशाही करार देते हुए कड़ी भर्त्सना की है। पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने न तो गिरफ्तारी का कोई कारण बताया और न ही वारंट दिखाया। दोनों नेताओं को किस धारा के तहत या किस मामले में गिरफ्तार किया गया है, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया। उन्हें कहां ले जाया गया है, इसकी जानकारी भी परिजनों और पार्टी कार्यकर्ताओं को नहीं दी गई।
गिरफ्तारी के समय दोनों नेता वाराणसी में एक दिवंगत साथी की अंत्येष्टि में शामिल होकर लौट रहे थे।
आदिवासी वनाधिकार संघर्ष की पृष्ठभूमि
कॉमरेड सुधाकर यादव और कॉमरेड जीरा भारती मिर्जापुर जिले में आदिवासियों के वनाधिकार कानून के तहत अधिकार दिलाने के संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी मांग है कि आदिवासियों का जबरन विस्थापन रोका जाए और वन विभाग द्वारा चलाई जा रही बुलडोजर कार्रवाई वापस ली जाए।
शुक्रवार तड़के मिर्जापुर के लालगंज क्षेत्र के तेंदुआ खुर्द आदिवासी बस्ती में वन विभाग ने बुलडोजर से कार्रवाई की। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की सूचना मिली है। आरोप है कि रात करीब दो बजे वन विभाग के कर्मचारी लहलहाती फसलों को उजाड़ने पहुंच गए। जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो उन पर हमला किया गया और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
प्रशासनिक आश्वासन की अनदेखी
भाकपा(माले) की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी ने बताया कि विंध्याचल मंडल के प्रशासनिक अपर कमिश्नर ने बुलडोजर न चलाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद बिना किसी नोटिस या सूचना के यह कार्रवाई की गई।
एक दिन पहले ही आदिवासी संगठनों ने प्रशासन के समक्ष प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि वनाधिकार कानून के तहत दावा दाखिल करने वालों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। पुश्तों से खेती करते आ रहे आदिवासियों और वनवासियों को उनकी जमीन से बेदखल न किया जाए। साथ ही वन विभाग और प्रशासन द्वारा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न बंद हो।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की मिलीभगत से भूमाफिया वन विभाग की जमीनों पर संगठित रूप से कब्जा कर रहे हैं।
तत्काल रिहाई की मांग
भाकपा(माले) की केन्द्रीय कमेटी ने दोनों नेताओं की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की है। पार्टी ने आदिवासी बस्तियों में बुलडोजर कार्रवाई तुरंत रोकने की भी मांग की है। संगठन ने कहा है कि यह कार्रवाई आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
यह घटना उत्तर प्रदेश में आदिवासी और वनवासी समुदायों के अधिकारों के मुद्दे पर सवाल खड़े करती है। वनाधिकार कानून 2006 के तहत आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार मिलने चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखती है।





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